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शहबाज-मुनीर ने ट्रंप से गद्दारी की: युद्ध के दौरान ईरान को पाकिस्तान में लड़ाकू विमान छुपाने की इजाजत दी थी, मध्यस्थता का खेला था झूठा नाटक

वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचों-बीच स्थित है। वहां इतने बड़े विमानों को लोगों की नजरों से छिपाकर रखना नामुमकिन है।

रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि युद्धविराम लागू होने के कुछ दिनों बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजे थे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का एक अहम सैन्य ठिकाना है। बताया गया है कि इन विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह विमान निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मेरिका में इस रिपोर्ट को लेकर काफी नाराजगी है और कुछ अमेरिकी सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर यह सच साबित होता है तो पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करना होगा।

रिपोर्ट में ईरानी विमान को अफगानिस्तान भेजने का भी दावा, तालिबान ने गलत बताया

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था। अफगानी अधिकारी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले महान एयर का एक ईरानी विमान काबुल पहुंचा था। ईरान का एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान वहीं खड़ा रहा। जबकि तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद इन दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है और ईरान को ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है।

पाकिस्तान की भूमिका पर US में सवाल

इस रिपोर्ट पर अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही निकली तो अमेरिका को पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर दोबारा विचार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पुराने बयानों को देखते हुए उन्हें इस खबर पर ज्यादा हैरानी नहीं होगी।

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