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Petrol Diesel Price Hike : 5-7 रुपए बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, जानिए एक्सपर्ट्स ने क्यों किया शॉक्ड ?

उन्होंने बताया कि हालांकि सरकार और तेल कंपनियों ने अब तक आम जनता को बड़ी राहत देने की कोशिश की है, लेकिन बढ़ता और लगातार बना हुआ दबाव कीमतों में बढ़ोतरी से बचना मुश्किल बनाता जा रहा है.

ऊर्जा संकट का बोझ कौन उठा रहा है?

अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, मौजूदा ऊर्जा संकट अर्थव्यवस्था के चार मुख्य क्षेत्रों पर असर डाल रहा है. सरकारी तेल कंपनियां (OMCs), सरकार, औद्योगिक क्षेत्र और आम परिवार. उन्होंने समझाया कि अब तक, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करके इस बोझ का एक हिस्सा खुद उठाया है.

वहीं, तेल कंपनियां भारी “अंडर-रिकवरी” यानी सब्सिडी वाली दरों पर पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने से होने वाले नुकसान को झेल रही हैं. बनर्जी ने बताया कि औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए ऊर्जा की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं.

हालांकि, आम उपभोक्ताओं को अब तक इन बढ़ोतरी से काफी हद तक बचाया गया है. फिर भी, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर आम जनता पर भी पड़ना तय है.

यह संकट अलग क्यों है?

अनिंद्य बनर्जी का मानना ​​है कि मौजूदा स्थिति पिछली स्थितियों से अलग है. हालांकि तेल और गैस की कोई पूर्ण वैश्विक कमी नहीं है, लेकिन आपूर्ति मार्ग बाधित हो रहे हैं. पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इज़राइल से जुड़े तनाव ने तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं और शिपिंग कार्यों पर भारी दबाव डाला है.

उन्होंने आगे कहा कि ठीक इसी वजह से, यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि यह संकट कब तक जारी रहेगा. यह सिर्फ एक महीने तक चल सकता है, या कई महीनों तक खिंच सकता है. नतीजतन, सरकार सावधानी बरत रही है और ईंधन की कीमतों के संबंध में कोई भी फैसला जल्दबाजी में लेने से बच रही है.

OMC पर बढ़ता दबाव

सरकारी तेल कंपनियां इस समय कच्चे तेल को बाज़ार की ऊंची दरों पर खरीद रही हैं, फिर भी वे पेट्रोल, डीजल और LPG को तय कीमतों पर ही बेच रही हैं. इससे इन कंपनियों पर लगातार भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

जानकारों का मानना ​​है कि अगर सरकार कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति देती है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें शुरू में 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं. इसके अलावा, LPG सिलेंडर और CNG भी महंगे हो सकते हैं.

सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती

सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई पर काबू पाना और आम लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को रोकना है. एक तरफ, तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान लगातार बढ़ रहा है. दूसरी तरफ, ईंधन की बढ़ती कीमतों से परिवहन, कृषि और रोजमर्रा की चीज़ों का खर्च भी बढ़ सकता है. नतीजतन, बाजार और आम जनता, दोनों ही आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर पैनी नजर रखे हुए हैं.

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