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EPFO New Rules Update : प्राइवेट ट्रस्ट के लिए नई SOP, 32 लाख लोगों पर पड़ेगा असर …

नए नियम क्या हैं?

नई SOP के तहत, देश भर में काम कर रहे 1,250 से अधिक निजी ट्रस्टों के लिए अब यह अनिवार्य होगा कि वे अपने कर्मचारियों को जो लाभ प्रदान करते हैं, वे या तो EPFO ​​द्वारा दिए जाने वाले लाभों से बेहतर हों, या कम से कम उनके बराबर हों.

यदि कोई ट्रस्ट इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसकी ‘छूट की स्थिति’ (exempted status) तत्काल रद्द कर दी जाएगी. निष्क्रिय और गैर-KYC अनुपालन वाले खातों में जमा राशि—जिसमें अर्जित ब्याज भी शामिल है. EPFO ​​में स्थानांतरित करना होगा.

ब्याज दरों पर एक ‘सीमा’

निजी ट्रस्टों को अब अपने सदस्यों को मनमानी ब्याज दरें देने की अनुमति नहीं होगी. नए नियमों के अनुसार, किसी ट्रस्ट द्वारा दी जाने वाली ब्याज दर EPFO ​​द्वारा घोषित दर से 2% (200 आधार अंक) से अधिक नहीं हो सकती. यह उपाय इसलिए लागू किया गया क्योंकि कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) अपने कर्मचारियों को 30–34% जितनी उच्च ब्याज दरें दे रहे थे. एक ऐसी प्रथा जिसे वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित रूप से जोखिम भरा माना गया.

डिजिटल ऑडिट और शिकायत निवारण

यह नया 133-पृष्ठों का दस्तावेज अनुपालन के बोझ को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है. अनिवार्य वार्षिक भौतिक निरीक्षणों के बजाय, अब एक ‘जोखिम-आधारित’ डिजिटल ऑडिट प्रणाली लागू की जाएगी.

केवल उन्हीं ट्रस्टों की गहन जांच की जाएगी जिन्हें ‘उच्च-जोखिम’ (high-risk) के रूप में पहचाना जाएगा. इसके अलावा, प्रत्येक निजी ट्रस्ट के लिए अपना स्वयं का ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित करना अनिवार्य होगा, जो सीधे EPFO ​​की प्रणाली के साथ एकीकृत होना चाहिए. कर्मचारी अब अपनी शिकायतें सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे.

सीधे प्रभावित होने वाली कंपनियां

EPFO के रिकॉर्ड के अनुसार, टाटा, विप्रो और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियां अपने स्वयं के स्वतंत्र PF ट्रस्टों का प्रबंधन करती हैं. इनमें शामिल हैं.

निजी क्षेत्र: टाटा टी, विप्रो, इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), TVS मोटर और रेमंड लिमिटेड.

सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs): बोकारो स्टील, BHEL, इंडियन ऑयल (IOCL), ONGC और NTPC.

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