रायपुर जिला

तीन साल में 9 नाइजीरियन ठग गिरफ्तार:24 लाख की ठगी में नाइजीरियन गिरफ्तार दूतावास से पूछा- उसके पास कौन सा वीजा

  • छत्तीसगढ़ में ठगी करने वाले सभी नाइजीरियन का ठिकाना दिल्ली में
  • अब तक एक को भी जमानत नहीं

शिवानंद नगर की महिला से सोशल मीडिया में दोस्ती कर उससे 24 लाख की ठगी करने वाले नाइजीरियन की जानकारी दूतावास भेज दी गई है। नाइजीरियाई दूतावास से पूछा गया है कि ठग के पास कौन सा वीजा है? उसकी वैधता कब तक है? अगर उसकी वैधता खत्म हो गई तो वह अब तक कैसे रह रहा था? ठग फिलहाल जेल में है।

उसके खिलाफ चारसौबीसी का केस दर्ज किया गया है।पिछले तीन साल में अब तक 9 से ज्यादा नाइजीरियन ऑन लाइन ठगी के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब तक किसी को जमानत नहीं मिल पाई है। शिवानंद नगर की महिला को ठगी करने वाला आउत्तरा 9वां आरोपी है। आउत्तरा सहित सभी नाइजीरियन ऑन लाइन ठगी के आराेपी हैं। सभी ने बड़ी उम्र की अविवाहित महिलाओं से सोशल मीडिया में दोस्ती की। उनका विश्वास जीतने के बाद मोबाइल पर चैटिंग शुरू की। उसके बाद विदेशे से गिफ्ट भेजने का झांसा देकर उनसे ठगी की।सिटी एसपी तारकेश्वर पटेल के अनुसार विदेशी आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है।

इस दौरान वीजा की वैधता के आधार पर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पुलिस अफसरों के अनुसार कुछ ठगों ने पीड़ितों से समझौता कर जेल से छूटने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने इतनी कम रकम ऑफर की थी कि पीड़ितों ने समझौते से मना कर दिया।इसी वजह से नाइजीरियाई जेल से बाहर नहीं आ सके। नए केस के आरोपी के खिलाफ अभी केवल ठगी का केस दर्ज है। नाइजीरियाई दूतावास से उसके वीजा से संबंधित जानकारी मिलने पर उस आधार पर भी नया केस दर्ज किया जाएगा।

पीड़ित नहीं मानते तो पेशी पर नहीं आते ठग
ठगी के आरोपी कोर्ट में सुनवाई के दौरान समझौते की पूरी कोशिश करते हैं। किसी वजह से समझौता नहीं होने पर वे पेशी पर ही आना बंद कर देते हैं। अफसरों के अनुसार अलग-अलग कोर्ट से अब तक एक दर्जन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद उनकी तलाश की जा रही है।

जामताड़ा के ज्यादातर ठगों ने कर लिया समझौता
पुलिस के अनुसार झारखंड के जामताड़ा या दूसरे राज्यों से ठगी के मामले में गिरफ्तार हुए आरोपी कोर्ट से जमानत पर छूटने के बाद पीड़ित से संपर्क करते हैं। वे उन्हें ठगी का कुछ पैसा देने को राजी हो जाते हैं। पीड़ितों की रुचि भी उन्हें सजा दिलाने से ज्यादा अपने पैसे वापसी में रहती है। ऐसी दशा में वे आधा पैसा मिलने पर भी समझौते के लिए तैयार हो जाते हैं। पैसे मिलने की शर्त पर कोर्ट में केस वापस ले लेते हैं। उसके बाद आरोपी कोर्ट से बरी हो जाते हैं। यही वजह है कि जामताड़ा या अन्य राज्यों के ऑन लाइन ठगों में अब तक किसी को सजा नहीं हुई है। ज्यादातर केस या तो खत्म हो गए हैं या अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं। अफसरों के अनुसार कोर्ट में विवेचना के दौरान ही ठग अपने वकीलों के माध्यम से समझौते की पहल करवाते हैं।

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