दन्तेवाड़ा जिला

400 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर:गारमेंट फैक्ट्री में 4 महीने में साढ़े सात करोड़ रुपए की 1.27 लाख शर्ट सिलकर भेजी दिल्ली, बेंगलुरु

  • डैनेक्स यानी दंतेवाड़ा नेक्स्ट: जिले में जनवरी में हुई थी गारमेंट फैक्ट्री की शुरुआत

देखने में यह किसी आम गारमेंट फैक्ट्री जैसी ही है। लेकिन है, बेहद खास। वजह? नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा में यह फैक्ट्री 400 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। नाम है- डैनेक्स यानी दंतेवाड़ा नेक्स्ट। दंतेवाड़ा के हारम गांव में यह फैक्ट्री छह महीने पहले शुरू हुई थी।

इसे चला रही महिलाएं 45 दिन की ट्रेनिंग के बाद चार महीने में ही तकरीबन साढ़े सात करोड़ की 1.27 लाख शर्ट्स सिल चुकी हैं। इन्हें दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहरों में भेजा गया है। इस फैक्ट्री के जरिए महिलाएं हर महीने आठ से नौ हजार रुपए कमा रही हैं। यहां काम करने वाली महिलाएं कहती हैं, ‘पहले हम गांव या खेत में मजदूरी करते थे। उससे इतनी कमाई नहीं होती थी कि घर में मदद कर सकें। लेकिन अब हम आत्मनिर्भर हैं। साथ ही हमें नए-नए फैशन डिजाइन भी सीखने को मिल रहे हैं।’ इतना ही नहीं, डैनेक्स के साथ देश के कई गारमेंट ब्रांड, पुलिस और सीआरपीएफ ने सहमति पत्र पर दस्तखत किए हैं। कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया, ‘हारम व बारसूर के अलावा जिले में अन्य जगहों पर भी ऐसी फैक्ट्री खोलकर और महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा।’

डैनेक्स का बिजनेस

  • 25 अप्रैल को 1.65 करोड़ के 27,500 शर्ट्स की पहली खेप बेंगलुरु गई।
  • 25 मई को 1 करोड़ के 16,500 रेडीमेड कपड़ों की खेप बेंगलुरु भेजी गई।
  • 20 जून को 1 करोड़ की 20,000 शर्ट्स बेंगलुरु व दिल्ली रवाना की गई।
  • 26 जून को करीब एक करोड़ के 13,000 रेडीमेड कपड़े भेजे गए।
  • 31 जुलाई को तीन करोड़ रुपए की 50,000 शर्ट्स रवाना की गईं।

इस गारमेंट फैक्ट्री से जुड़ी खास बातें

  • 45 दिनों तक महिलाओं को ट्रेनिंग के बाद काम की शुरुआत।
  • गारमेंट फैक्ट्री में 300 जबकि बारसूर गारमेंट फैक्ट्री में अभी 100 महिलाएं काम कर रही हैं।
  • महिलाएं हर महीने 8-9हज़ार रुपए कमा रही हैं।
  • कटेकल्याण, बचेली में भी फैक्ट्री खुलेगी, यहां भी 300 से ज़्यादा महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
  • देश की कपड़ा कम्पनियों के अलावा पुलिस, सीआरपीएफ से भी एमओयू हुआ है।

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