जशपुर जिला

चलना मना है:रोड है या खेत…बारिश में फंसते वाहन और लगाने पड़ते हैं धक्के

  • गांवों को शहर से जोड़ने वाली जामुंडा-कटंगखार रोड जर्जर

बड़े-बड़े गड्‌ढ़ों व कीचड़ से भरी सड़क कांसाबेल विकासखंड के ग्राम जामुंडा से कटंगखार को जाती है। बरसात में सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि चारपहिया वाहन से भी गांव तक पहुंचना मुश्किल है। बरसात के दिनों में इन दोनों गांव में निवासरत ग्रामीण अपने-अपने घरों में कैद हो जाते हैं। हैरानी की बात है कि अब तक इस सड़क के लिए किसी भी योजना के तहत कोई प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है।

ग्रामीणों के मुताबिक यदि यह सड़क बन जाती है तो ग्राम जामुंडा के अलावा कटंगखार और चोंगरीबहार के ग्रामीणों को कोरंगा व कुंजारा जाने में दिक्कत नहीं होगी। कुंजारा के रास्ते से कांसाबेल ब्लॉक मुख्यालय आसानी से निकला जा सकता था। पर इस सड़क पर ना तो जनप्रतिनिधियोें का ध्यान है और ना ही प्रशासन का। इस सड़क की मांग को लेकर कई बार स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी है। इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि, लोक सुराज व मंत्रियों के कार्यक्रम में भी सड़क की मांग रख चुके हैं। पर अबतक सड़क बनाने में किसी ने कोई रूचि नहीं दिखाई है। इन दिनों कीचढ़ भरे इस सड़क से दोपहिया वाहनों का भी चलना मुश्किल है। हर वक्त दुर्घटना का डर बना रहता है। रोजाना इस सड़क पर छिटपुट दुर्घटनाएं हो रही हैं।

यहां खाट बनती है सवारी
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम जामुंडा में बरसात के दिनों में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है। इस गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल तबतक नहीं पहुंचाया जा सकता है जब तक चार से छह ग्रामीण ना जुटें। मरीज को चारपाई पर लिटाकर चार लोग उसे कंधे पर ढोकर कटंगखार तक लाते हैं। इसके बाद उन्हें वाहन मिल पाता है। कम गंभीर मरीजों को साइकिल की कैरियर पर बैठाकर तीन लोग पैदल चलते हुए साइकिल को कीचड़ भरे रास्ते से पार कराते हैं। इस दौरान
कई बार कीचड़ में फिसलकर वे नीचे भी गिर जाते हैं।

अफसर भी बेपरवाह
पहुंचविहीन गांव तक सड़क बनाने का काम ज्यादातर जनपद पंचायत विभाग से होता है, पर कांसाबेल जनपद पंचायत में अफसरों को इसकी कोई फिक्र नहीं है कि उनके विकासखंड में कितने गांव पहुंचविहीन हैं। बरसात में किस गांव तक राशन पहुंच रहा है और कौन से गांव सड़क के अभाव में अलग हो चुके हैं। जामुंडा में सड़क ना होने को लेकर कांसाबेल के जनपद सीईओ लक्ष्मीनारायण सिदार के पास कई बार ग्रामीण फरियाद कर चुके हैं। सुत्रों के मुताबिक इस सड़क को लेकर सीईओ द्वारा कोई प्राकलन बनाकर भेजा नहीं गया है। जब हमने उनसे बात करने के लिए संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

हाथी प्रभावित गांव, मदद के लिए नहीं पहुंच सकता कोई
यह हांथी प्रभावित गांव भी है। शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को ही हाथी ने एक वृद्धा का मकान तोड़ दिया। गांव में यदि हाथी घुस जाए तो मदद के लिए वन विभाग के कर्मचारी भी नहीं पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों के पास जो साधन है सिर्फ उसी से वे अपने जान-माल की रक्षा करते हैं। गांव के संजय सिंह का कहना है कि इस गांव में जनप्रतिनिधियों का आगमन हर पांच साल में सिर्फ चुनाव के वक्त होता है। हर साल नेताओं द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ यही लालच दिया जाता है कि इस गांव में सबसे पहले वे सड़क बनवाएंगे। ऐसे ही कई दसक बीत चुके हैं पर अबतक सड़क नहीं बन पाई।

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