नई पहल:नक्सल आतंक से मुक्ति की राह पर… 15 गांवों की पहली सूची जारी, अब होगा सर्वे

- सूची में दंतेवाड़ा और भांसी थाना इलाके के ज्यादातर गांव, डीएसपी स्तर के अफसरों को मिला जिम्मा
नक्सलमुक्त होने वाले गांवों की पहली सूची सोमवार को पुलिस ने जारी कर दी है। अभी इस सूची में 15 गांव हैं। बताया जा रहा है इसके अलावा भी करीब 5-6 गांवों की सूची अभी पुलिस और जारी करेगी। इन सभी गांवों के सर्वे के बाद 15 गांवों की फाइनल सूची पुलिस बनाकर उनके नक्सलमुक्त होने की घोषणा करेगी।
अभी जो सूची जारी की गई है उनमें दंतेवाड़ा व भांसी थाना क्षेत्र के ज्यादातर गांव हैं। इस काम के लिए डीएसपी लेवल के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि अभी 15 गांव की सूची बनी है। जो गांव ऑरेंज से ग्रीन जोन में आए हैं ऐसे और गांवों की भी सूची बन रही है। सर्वे व फीडबैक के बाद नक्सलमुक्त गांव के नाम की घोषणा 15 अगस्त को करेंगे। इसके पहले कोई भी व्यक्ति उस गांव जाकर वहां हुए बदलाव के हालात जान सकता है। 15 अगस्त को डीएसपी रैंक के अधिकारी गांव में जाकर ग्रामीणों के साथ राष्ट्रध्वज फहराकर सलामी लेंगे।
पहली सूची में ये गांव
बारसूर थाना क्षेत्र के हितामेटा, हिड़पाल, गीदम थाना क्षेत्र के बड़े तुमनार, बड़े सुरोखी, भांसी थाना क्षेत्र के धुरली, गमावाड़ा, मसेनार, बड़े कमेली, दंतेवाड़ा थाना के चंदेनार, कूपेर, डुमाम, कंवलनार, फुलनार, कुआकोंडा का गढ़मिरी व फरसपाल का केशापुर शामिल हैं।
जानिए, ऐसे कुछ गांवों के बारे में जो नक्सलमुक्त होने की राह पर हैं
बड़े तुमनार: यहां का साप्ताहिक बाजार नक्सलियों का सबसे बड़ा टारगेट रहा है। इंद्रावती नदी किनारे व माड़ इलाके से सटा होने कारण यहां नक्सली कई बार उत्पात मचाते आए हैं। साप्ताहिक बाजार में सचिव की हत्या, जवानों पर हमला, व्यापारी पर हमला कर हत्या जैसी कई बड़ी वारदातें साल दर साल हुई हैं। अक्सर पर्चे भी मिले। जनवरी 2017 में साप्ताहिक बाजार के दिन ही ब्लास्ट की घटना हुई। इसके बाद पुलिस सख्त हुई। इस घटना के बाद साढ़े 3 साल में एक भी नक्सली वारदात नहीं हुई है। ग्रामीण अब खुद मान रहे हैं कि इलाके में शांति है।
गढ़मिरी: कुआकोंडा थाना क्षेत्र का ये भी नक्सलगढ़ गांव रहा है। यहां नक्सलियों का राज ऐसा हावी रहा कि पीएम आवास सहित अन्य जरूरी योजनाओं पर ही रोक लगा दी थी।
गमावाड़ा: सड़क किनारे ये गांव जरूर बसा है। लेकिन घटनाओं को अंजाम देने नक्सली इस गांव में भी पीछे नहीं हटे। यहां साल 2018 को बसों में आगजनी की घटना को अंजाम दिया था। जिसमें एक युवक की जिंदा जलने से मौत हुई थी।
मसेनार: इस गांव के हालात भी बेहद खराब रहे हैं। नक्सली यहां के सक्रिय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणों की हत्या कर चुके हैं। वाहनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं। नक्सलियों की बैठक भी हुआ करती थी।
बड़े सुरोखी: नेशनल हाइवे के किनारे ये गांव जरूर बसा है। लेकिन पहाड़ों से घिरा है। नक्सली इस गांव में आना-जाना करते रहे हैं। गांव में दहशत रही है। यहां सीएएफ का कैंप खुलने के बाद थोड़ी राहत है। ग्रामीण बताते हैं स्थिति अभी ठीक है।



