कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

कन्हैया गावड़े हत्याकांड:आदिवासी समाज में शव दफनाने का रिवाज फिर भी क्यों करा दिया गया कन्हैया का दाह संस्कार

  • पुलिस ने पहले सामान्य मौत बताया, दोबारा जांच में मामला हत्या का निकला

कन्हैया गावड़े की मौत की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती जा रही है। गावड़े की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुलिस ने भले ही बीड़ी को लेकर विवाद होने की बात कहते हुए हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इस मामले में अभी भी बहुत से सवाल अनसुलझे हुए हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए हत्या के आरोपी का कहना है बीड़ी को लेकर हुए विवाद के चलते उसने कन्हैया गावड़े के सिर पर सिलबट्टा मार हत्या की थी। जबकि मृतक के पुत्र का कहना है कि उनके पिता बीड़ी पीते ही नहीं थे ताे बीड़ी को लेकर विवाद कैसे हो सकता है। बीड़ी की कहानी गले से नहीं उतर रही है।

इस मामले में इससे भी बड़ा सवाल यह है कि कन्हैया गावड़े आदिवासी समाज से था और इस समाज में प्रथा है कि लाश को दफनाया जाता है। पुत्र के अनुसार उनके कुनबे में भी यही रिवाज चला आ रहा है। फिर इस मामले में क्यों और किसके दबाव में लाश का अंतिम संस्कार किया गया। कन्हैया गावड़े की मौत को शुरू से पुलिस ने सामान्य मौत बताते मर्ग कायम कर लिया था। समाज तथा परिजनों ने मामले को उठाया तो पुलिस ने दोबारा जांच की। जिसमें मामला हत्या का निकला तथा पुलिस ने हत्या के आरोपी युवक को गिरफ्तार भी कर लिया है।

इसके बावजूद मामले में बहुत से सवाल उठ रहे हैं। पहला पुलिस ने बताया कि हत्या का आरोपी युवक तथा मृतक साथ में बैठ शराब पी रहे थे। इसी दौरान दोनों में बीड़ी को लेकर विवाद हुआ जिसके बाद तैश में आकर युवक ने सिलबट्टा सिर पर मार हत्या कर दी थी। मृतक का मोबाइल तथा लूना लेकर आरोपी फरार हो गया था।

विरोध किया तो पुलिस बुलाकर पुत्र को चुप करा दिया गया : मृतक के पुत्र संजू गावड़े का कहना है उनके परिवार में दाह संस्कार नहीं किया जाता। परिवार के मृत सदस्यों को केवल दफनाया जाता है। उसने अपने पिता के दाह संस्कार का विरोध भी किया था। मृतक के पुत्र ने यह भी कहा कि दामाद सुनील नरेटी जिनकी भूमिका शुरू से संदेहास्पद है उनके दबाव में दाह संस्कार किया गया। मैंने जब विरोध किया तो दाह संस्कार स्थल पर पुलिस जवान भी बुलाए गए जिसके बाद उसे चुप रहना पड़ा।

सील बट्‌टे से सिर पर वार तो चोट के निशान क्यों नहीं?
पुलिस ने शुरू से ही इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया यही कारण है कि मृतक के मोबाइल तथा लूना की खोजबीन नहीं की। सबसे बड़ा सवाल पोस्टमार्टम रिर्पोट तथा हत्या के आरोपी युवक के बयान को लेकर है। पोस्टमार्टम रिर्पोट में इसे सामान्य मौत बताया गया था तथा शरीर में कहीं भी चोट आदि के निशान नहीं मिलना बताया गया था। जबकि हत्या के आरोपी का कहना है कि उसने सिलबट्टे से सिर पर वार किया था।

अदिवासी समाज की परंपरा के विपरीत मृतक का अंतिम संस्कार दफना कर नहीं किया गया बल्कि दाह संस्कार कर किया गया। यह दाह संस्कार क्यों तथा किसके दबाव में किया गया था? समाज व परिजन इसे लेकर भी जांच करने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि इस दिशा में जांच करने पर कई बड़े मामले सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही इस षड़यंत्र में शामिल लोग भी सामने आएंगे।

संदेह, कहीं सबूत मिटाने का प्रयास तो नहीं
अब तक शव के पोस्ट मार्टम रिर्पोट को लेकर शंका हो रही है। यदि लाश को दफनाया गया होता तो दोबारा लाश निकाल पोस्टमार्टम करा कर इसकी शंका को दूर की जा सकती थी। दोबारा पोस्टमार्टम से मौत की असली वजह सामने आ जाती। लेकिन इस मामले में लाश का दाह संस्कार किया गया। ऐसा इसलिए भी किया गया हो सकता है कि भविष्य में भी बुजुर्ग की मौत का सबूत किसी के हाथ न लगे और षड़यंत्र में शामिल लोगों के नाम कभी सामने आ ही न सकें।

अब तक ये सवाल भी रह गए हैंं अनसुलझे
पुलिस ने पहले मौत को सामान्य बताकर केस को क्यों ठंडे बस्ते में डाला? समाज के दबाव पर दोबारा जांच हुई तो चंद दिनों में आरोपी पकड़ा गया लेकिन जिससे हत्या हुई वह सिलबट्टा आज तक क्यों बरामद नहीं हुआ? जब परिवार में मृतक को दफनाने की परंपरा है तो उसका दाह संस्कार क्यों किया गया? पिता के दाह संस्कार का जब पुत्र ने विरोध किया तो पुलिस ने इसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं ली? मामले में पुत्र के विरोध के बावजूद पुलिस ने सूचना इलाके के तहसीलदार या एसडीएम को क्यों नहीं दी?

संजू गावड़े झूठ बोल रहा: सुनील नरेटी
मृतक कन्हैया गावड़े के दामाद सुनील नरेटी का कहना है संजू गावड़े झूठ बोल रहा है। उसने दाह संस्कार का कोई िवरोध नहीं किया था। दाह संस्कार के समय पुलिस के जवान मौजूद थे।

बीड़ी नहीं लेकिन गांजा पीता था: थाना प्रभारी
थाना प्रभारी एमएल पटेल ने कहा कि कन्हैया गावड़े के दाह संस्कार में पुलिस मौजूद थी या नहीं यह पता नहीं क्योंकि यह मेरे भानुप्रतापपुर थाना आने के पहले का मामला है। परिजनों ने बयान दिया है कि मृतक बीड़ी नहीं पीते थे लेकिन वे बीड़ी में गांजा डालकर पीते थे। मामले की अभी जांच चल रही है।

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