सरकार बनाती तो 6 माह लग जाते:ग्रामीणों ने 20 दिन में ही बना दी 4 किलोमीटर लंबी नहर, अब बुझेगी 500 एकड़ खेतों की प्यास

सरकार से कई सालों में कई बार मांगों के बाद भी एक नहर न मिल पाने पर किसान अपने खेतों की प्यास बुझाने और निस्तारी के लिए तालाबों तक पानी पहुंचाने खुद ही भगीरथ बन गए। जनसहयोग से किसानों ने 4 किलोमीटर की कच्ची नहर तैयार कर दी। इससे पानी भी आने लगा है और अब इससे ही 500 एकड़ के खेतों की प्यास बुझेगी और फसलें लहलहाएंगी।
यही नहर यदि सरकारी विभाग बनाते, तो 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो जाते, जबकि इसे बनाने में तमाम प्रक्रियाओं को मिलाकर 6 महीने लगते, लेकिन आपस में मिलकर ग्रामीणों ने इसे 20 दिन में ही तैयार कर लिया। सहसपुर लोहारा ब्लॉक मुख्यालय से दाहिनी ओर का रास्ता रेंगाखार जंगल की ओर जाता है।
लोहारा नगर पंचायत से पार होते ही दाहिनी ओर एक पतली ही नहर आती नजर आती थी। मिट्टी को हटाकर कुछ गहरा करके इसे यह स्वरूप दिया गया है, इसके जरिए आने वाला पानी खेतों तक पहुंचाया जाना है। कुछ रकबे तक इसका पानी पहुंचने भी लगा है। इसी पानी से कुछ गांवों के तालाबों को भी भरा जाना है।
किसान व ग्रामीण लंबे समय से इस नहर की मांग सरकार से कर रहे थे, लेकिन सरकार से यह काम न होता देख, उन्होंने खुद ही इसे पूरा करने का बीड़ा उठाया। कुछ समाजसेवियों ने भी मिट्टी हटाने के लिए अपनी गाड़ियां भेजीं और इस मदद से यह छोटी सी नहर तैयार हो गई।
किसानों ने अपनी जमीन दी, श्रमदान किया
इस नहर के किनारे किसान शत्रुहन साहू की आधा एकड़ की जमीन है। वे इस पर धान की बुआई कर चुके हैं। शत्रुहन बताते हैं कि पहले वे बारिश के पानी व बोर पंप के सहारे सिंचाई करते थे, लेकिन अब नहर से पानी मिलने लगा है, पानी को लेकर जो सपना हमने देखा था, वह सच हो गया है। ऐसा ही किसान बुधारी पटेल, मूल सिंह टंडन, राजाराम साहू, संतोष साहू, गोरेलाल साहू भी बताते हैं। इस नहर के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, कुछ किसानों ने अपनी जमीन भी दी है व श्रमदान भी किया है।
तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष राजा खड्ग राज सिंह ने किसानों को इसके लिए अपनी जमीन भी दी थी व कुछ धनराशि भी मुहैया कराई थी। अब सभी के मिश्रित प्रयास से खेतों तक पानी पहुंचने लगा है।
अब इससे तालाबों में भी निस्तारी के लिए पानी भर सकेंगे ग्रामीण
सुतियापाट बांध से पानी खेतों तक पहुंचाने के लिए नहर तो बनाई गई है, लेकिन लोहारा समेत, तेलीपारा, छोटूपारा, बानो, पिपरटोला, भिनपुरी व तेलाईभाठ तक इसका पानी नहीं पहुंच पा रहा था। वजह थी कि नहर इन इलाकों से होकर नहीं गुजरता था।
ऐसे में सुतियापाट बांध की छोटी नहर से होकर ही ग्रामीणों ने खेतों व तालाबों तक पानी पहुंचाने एक और नहर तैयार कर ली। अब इसका फायदा यह हुआ कि इस लगभग 4 किलोमीटर नहर से बहकर आने वाले पानी से इन गांवों के लगभग 200 हेक्टेयर यानी 500 एकड़ के खेतों की सिंचाई हो सकेगी। साथ ही इन गांवों के तालाबों में 12 महीने निस्तारी का पानी भरा रहेगा।
जिले में अटकी प्रमुख सिंचाई योजनाओं का हाल
- तारो जलाशय से 88 लाख रुपए में 1.80 किमी. की नहर कागज में बना दी गई।
- सुतियापाट बांध से 16 किमी. नहर के लिए 16.50 करोड़ स्वीकृत हैं, पर बनी नहीं।
- पंडरिया ब्लॉक में कूबा डायवर्सन के नहर का काम अब तक पूरा नहीं किया गया है।
- घोघरा डायवर्सन से डोंगरिया माइनर नहर की स्वीकृति मिली, लेकिन काम पूरा नहीं।
- अपर आगर डायवर्सन से कच्ची नहर बनाकर छोड़ा, इसे पक्का नहीं किया गया।
- किलकिला डायवर्सन से नहर लाइनिंग के लिए 3 करोड़ का काम अटका है।



