महंगी अनदेखी:3.75 करोड़ का धान खराब 20 समितियों से होगी वसूली

- समय पर उठाव नहीं होने से 1500 टन धान बेकार
जिले की 20 सोसाइटियों में 1500 टन धान खराब पाया गया है । तीन करोड़ 75 लाख रुपए का धान खराब होने के कारण मिलर्स उठा नहीं रहे हैं। शुक्रवार को धरमजयगढ़ खड़गांव समिति लगभग 58 करोड़ की गड़बड़ी पर एफआईआर कराई गई है। खाद्य, सहकारिता, अपेक्स बैंक और मार्कफेड की टीम अब इन 20 समितियों के संचालकों पर भी एफआईआर कराएगी जिनके उपार्जन केंद्रों में धान खराब हो गया है। ज्यादातर समितियों से धान का उठाव लगभग पूरा हो चुका है। 20 सोसाइटियों में 15 हजार क्विंटल धान का उठाव नहीं हुआ है।
इसकी वजह यह है कि समय पर उठाव नहीं होने के कारण धान खराब हो गया है। बेमौसम बारिश पर सहकारिता विभाग धान को सुरक्षित रखने का दावा करता रहा। समय पर उठाव नहीं कराया जा सका, अब धान के खराब होने पर समितियों पर एफआईआर कर करोड़ों रुपए के नुकसान पर लीपापोती होगी। लैलूंगा ब्लॉक के ही लिबरा, राजपुर, लारीपानी, केशला, खडग़ांव जैसी सोसाइटियों में ही सात हजार क्विंटल धान का निराकरण नहीं हुआ है। एक करोड़ 75 लाख रुपए की वसूली की जानी है। इन सोसाइटियों के खिलाफ दो- चार दिनों में एफआईआर कराई जाएगी।
3 हजार क्विंटल धान का निराकरण
खरीदी के बाद 18 हजार क्विंटल धान का निराकरण नहीं हो सका था। कुछ दिनों में तीन क्विंटल की वसूली हो पाई। 15 हजार क्विंटल यानि 3 करोड 75 लाख रुपए वसूली होनी है यानि समितियों से सही गुणवत्ता वाला इतना धान मांगा जाएगा। 20 सोसाइटियों में लैलूंगा की चार सोसाइटियों के अलावा धरमजयगढ़, पुसौर ब्लॉक के गढ़उमरिया, छिछोर उमरिया, जतरी, बड़े भण्डार, पड़िगांव समितियों से वसूली की जानी है। ये सारी सोसाइटियां पिछले एक-डेढ़ माह से दो-तीन दिनों का समय देने की मोहलत मांग रहे हैं, पैसा जमा नहीं किया है।
ठीकरा समितियों के सिर फोड़ेगा विभाग
बेमौसम बारिश हुई, दो महीने कोरोना लॉकडाउन के कारण समितियों में धान की देखरेख नहीं हुई। जिन 20 समितियों में 1500 टन धान का निराकरण नहीं होना बताया जा रहा है, इसका मतलब धान खराब हो गया है जिसे मिलर उठा नहीं रहे हैं। इसकी मिलिंग हो भी तो इससे तैयार चावल कोई नहीं लेगा। अपनी नाक बचाने विभाग के अफसर अब समिति संचालकों पर एफआईआर कराएंगे।
सोसाइटी प्रबंधकों पर होगी कार्रवाई
सोसाइटी के सदस्यों को धान की भरपाई करना होगा, वे धान दे दे नहीं तो उसका पैसा दें। नहीं तो अनुबंध के तहत सोसाइटी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार के निर्देश के अनुसार ही सब कुछ किया जा रहा है, आगे भी कार्रवाई की जाती रहेगी।
-सुरेन्द्र गौड़, प्रभारी सहायक पंजीयक, सहकारिता विभाग



