विडंबना:दो सीएम की घोषणा के बाद भी नहीं बनी सन्ना जशपुर की 9 किमी सड़क

- 6 साल से अधूरी पड़ी है सड़क, यात्रियों को सफर तय करने में लग रहे एक घंटे
दो मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी जशपुर सन्ना की 9 किलोमीटर सड़क का निर्माण अब तक अधूरा पड़ा है। तहसील का दर्जा प्राप्तकर चुके सन्ना तक पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महज 9 किलोमीटर अधूरी सड़क का निर्माण कार्य सरकारी फाइलों में बजट की मंजूरी के लिए अधिकारियों के टेबल में फाइलों में ही कैद है, जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिसबंर 2020 में जिला मुख्यालय के पहले प्रवास के दौरान अधूरी सड़क निर्माण का कार्य पूरा करने की घोषणा रणजीता स्टेडियम के मंच से की थी। इससे पहले 2015 में प्रदेश के तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी सड़क का निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए अलग से राशि मंजूर करने की घोषणा पंड्रापाठ में आयोजित आमसभा में की थी।
अधूरे जशपुर-सन्ना पहुंच मार्ग का मामला मई 2015 में प्रदेश स्तर पर जमकर सुर्खियां बटोर चुका है। इस मामले को लेकर उस वक्त लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया था,जब तात्कालिन पीडब्ल्यूडी मंत्री 14 मई 15 को एक दिवसीय प्रवास पर जशपुर आए थे। सड़क की बदहाली की शिकायत मिलने पर वे अधिकारियों पर बिफर पड़े थे। उन्होंने सड़क का निर्माण किए बिना ही कंस्ट्रक्शन कंपनी को 4 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भुगतान करने पर 3 अधिकारी और अंबिकापुर की एक निर्माण कंपनी के खिलाफ सिटी कोतवाली में धारा 120 बी, 420, 467 और 468 के तहत मामला भी दर्ज कर लिया था।
पहाड़ी कोरवाओं को जिला मुख्यालय से जोड़ती है रोड
सबसे बड़ा निवास जिले का बगीचा और मनोरा तहसील प्रदेश का सबसे बड़ा पहाड़ी कोरवाओं का निवास क्षेत्र है। पंड्रापाठ, सुलेसा, चुंदापाठ, हर्रापाठ जैसे क्षेत्र में बहुसंख्या में पहाड़ी कोरवा निवास करते हैं। इन क्षेत्रों को जशपुर सन्ना सड़क जिला मुख्यालय से सीधे जोड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर इसी मार्ग से इन क्षेत्रों में पहुंचा जा सकता है। स्वास्थ्य सेवा के लिए जिला चिकित्सालय की सहायता लेने के लिए भी इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह सड़क जीवन रेखा से कम नहीं है। किसान जशपुर के बजाय अंबिकापुर भेज रहे उत्पाद सन्ना व पंडरापाठ इलाके से शहर में दूध, घी, आलू, नाशपाती, चावल , गेंहू, मिर्च और हरी सब्जियां आती हैं।
52 किमी स्टेट हाइवे का निर्माण 6 दशक से अटका
जिला मुख्यालय जशपुर से सन्ना की दूरी मात्र 52 किलोमीटर की है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ दुर्गम पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरने वाले जशपुर सन्ना मार्ग के निर्माण का खेल पिछले 60 साल से अधिक समय से चल रहा है। सड़क के निर्माण के लिए टेंडर और कुछ दिनों के निर्माण के बाद ठेकेदार द्वारा काम बंद कर दिए जाने का सिलसिला साल दर साल चल रहा है। निविदा की प्रक्रिया पूरी कर क्लासिक कंस्ट्रक्शन कंपनी को 52 किलोमीटर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी नए सिरे से दी गई। इस बार सड़क के नवीनीकरण और चौड़ीकरण का काम किया गया, लेकिन इन सारे कवायदों के बावजूद इस सड़क का निर्माण कार्य अधूरा रह गया।
नौ किलोमीटर की दूरी तय करने में लग रहे एक घंटे
जशपुर से सन्ना की दूरी महज 52 किलोमीटर की है, लेकिन इस दूरी को तय करने में आज भी लोगों के पसीने छूटते हैं। दरअसल हर्राडिपा से लेकर सन्ना के बीच तकरीबन 9 किलोमीटर सड़क प्रदेश सरकार के 17 करोड़ रुपए खर्च कर दिए जाने के बावजूद अधूरा पड़ा है। इस सड़क के चौड़ीकरण और नवीनीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग दो बार प्रस्ताव बना कर प्रदेश सरकार को भेज चुकी है, लेकिन दोनों ही बार सरकार ने प्रस्ताव को बैरंग लौटा दिया है। 2016 में पहाड़ी कोरवा लंबू राम की भूख से हुई कथित मौत की घटना के बाद,पंड्रापाठ पहुंचे तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के सामने भी सन्ना के इस विवादित सड़क का मामला उठा था।
रिवाइज इस्टीमेट को मंजूरी मिलने पर काम होगा
पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता एलडब्ल्यू तिर्की के अनुसार सन्ना जशपुर के अधूरे सड़क निर्माण के लिए रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा गया है। यह निर्माण मुख्यमंत्री की घोषणा में भी शामिल है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ करवा दिया जाएगा।



