छत्तीसगढ़ विशेष

कोरोना इफेक्ट:रथ खींचने सीमित संख्या में आए भक्त तो पहली बार ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवानों ने थामी रस्सी

  • जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी और 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के लोग हुए शामिल, जय जगन्नाथ नारे लगाते निकाली गई गोंचा यात्रा

गोंचा महापर्व पर इस साल भी कोरोना का असर दिखाई दिया। इस साल काफी कम लोग ही शामिल हुए। मास्क लगाकर परंपरा निभाई। सावधानी ऐसी थी कि 6 सौ साल में पहली बार एेसा हुआ कि भक्तों के साथ पुलिस जवानों ने भी रथ खींचा। तीन की जगह एक रथ ही निकाला गया।

परंपरा के अनुसार रथयात्रा से पहले जगन्नाथ मंदिर में पुजारियों ने भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की। इसके बाद रथ पर विग्रहों को विराजित किया तो वहीं दूसरी ओर रथ की पूजा करने से लेकर अन्य विधानों में लोग मास्क भी पहने हुए थे। रथ यात्रा में सांसद दीपक बैज, विधायक रेखचंद जैन, विधायक अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार, महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमई नायक, महापौर सफीरा साहू, कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, किरण देव, श्रीनिवास मिश्रा, कलेक्टर रजत बंसल और टेंपल कमेटी के सदस्यों के साथ ही अन्य लोग शामिल थे।

इस साल तुपकी कम, पेंगू ज्यादा बिके

कोरोना संक्रमण का असर तुपकी की बिक्री पर भी पड़ा। नानगुर के ग्रामीणों ने कहा कि दो साल पहले तक करीब तीन से चार हजार तुपकी बिकती थी। इस साल एक हजार भी तुपकी नहीं बिकी। तुपकी से ज्यादा पेंगू लेकर ग्रामीण शहर पहुंचे थे। दो साल पहले तक एक तुपकी 20-25 रुपए मे मिलती थी। जबकि इस साल इसका रेट 50-80 रुपए था। झालर लगी तुपकी खरीदने में लोगों ने ज्यादा रुचि दिखाई। तुपकी कम अाने और मांग अधिक होने से ग्रामीणों ने इसका रेट बढ़ा दिया था।

9 दिन सिरासार में विराजेंगे जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा, प्रसाद नहीं मिलेगा

सोमवार को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथारूढ़ होकर नगर परिक्रमा के लिए निकले हैं। रथा की परिक्रमा खत्म होने के बाद जनकपुरी में 9 दिनों तक विश्राम कर अन्य श्रद्धालुओं को दर्शन लाभ देंगे। इस विधान को पूरा करने की तैयारी समाज के लोगों ने दो दिनों पहले से ही शुरू कर दी थी। समाज के लोगों ने बताया कि इस विधान को भी जिला प्रशासन से जारी आदेश के तहत पूरा किया जाएगा। यहां पर सत्यनाराण कथा होगी। कोरेाना संक्रमण के नियमों का पालन करते हुए कम संख्या में लोगों को कोरोना गाइडलाइन के पालन के साथ जनकपुरी में जाने दिया जाएगा। वहां पर प्रसाद नहीं मिलेगा। कोरोना को देखते हुए इस बार ज्यादा सावधानी रखी जा रही है। इस दौरान सभी मास्क पहने रहे।

रथयात्रा से शुरू करने से पहले राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने झाड़ू लगाया

परंपरा के अनुसार भगवान को रथारूढ़ करने के बाद रथ परिक्रमा से पहले राज परिवार के सदस्य रथ के सामने पूजा अर्चना की और चांदी के झाड़ू से रथ के चारों ओर झाड़ू लगाकर छेरा पहरा की रस्म निभाई। इसके साथ ही हरि बोलो के जयघोष के साथ तथा तुपकी की सलामी के मध्य भगवान जगन्नाथ के रथ की परिक्रमा शुरू हुई। रथ यात्रा करीब 5.30 बजे प्रारंभ हुई, मावली माता मंदिर का परिक्रमा करने के बाद देवताओं को जनकपुर (सिरहासार) में स्थापित किया गया। जहां वे 20 जुलाई तक अपनी मौसी के घर में रहेंगे।

अमनिया कार्यक्रम में शामिल होंगे श्रद्धालु

भगवान जगन्नाथ के जनकपुरी में रहने के दौरान जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार से 7 दिनों तक अमनिया कार्यक्रम होगा। इसमें 104 गांवों के समाज के शामिल होंगे। समाज के लोगों ने कहा कि इससे पहले अमनिया कार्यक्रम में महाभंडारा होता था। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते थे लेकिन इस साल इसमें परिवर्तन किया गया है।

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