जशपुर जिला

खतरनाक मोड़:रिपेयरिंग नहीं कर रहे, इसलिए कीचड़ से सराबोर सड़क, घाटी में है हादसे का डर

मनोरा से लुखी मधवा को जोड़ने वाली पीएमजीएसवाई की मुख्य सड़क की हालत बेहद खराब है। बारिश में यह सड़क चलने लायक नहीं है। सड़क पर कई बड़े गड्‌ढे बने हैं, जिसमें पानी भरा है। सड़क से डामर की परत उखड़ चुकी है और जहां सड़क है। वह कीचड़ से पटा हुआ है। ऐसी स्थिति में इस सड़क पर चलना खतरों से खेलने के बराबर है, क्योंकि इस सड़क पर 4 किमी की घाटी है। यदि वाहन चलाने के दौरान थोड़ी सी भी चूक हुई तो गाड़ी 100 फीट से गहरी खाई में गिर सकती है।

सड़क की खराब स्थिति कांटाबेल से शुरू होती है। कांटाबेल से मधवा तक सड़क पर घाटी है और कई खतरनाक मोड़ है। इन मोड़ों पर भी सड़क बह चुकी है। ऐसा नहीं है कि सड़क पर वाहनों का आवागमन काफी अधिक होता है। सड़क पर ट्रैफिक का दबाव ना के बराबर है। इसके बावजूद यह सड़क सिर्फ रिपेयरिंग के अभाव में इतनी खराब हो चुकी है कि अब लोग इस सड़क पर चलने से डरने लगे हैं। कांटाबेल से मनोरा व गजमा को जोड़ने वाली इस सड़क का निर्माण करीब 10 साल पहले किया था, जब सड़क नहीं थी तो गजमा, मधवा आदि इलाके पहुंचविहीन गांव की श्रेणी में आते थे। गजमा, मधवा, लुखी आदि गांव जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां अति पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा लोग रहते हैं। इन तक योजनाओं का पहुंचाने और जनजातियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में सड़क की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, पर बरसात में सड़क की खराब हालत के कारण इन इलाकों में जाना दूभर हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की मरम्मत और नई सड़क के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियोें को आवेदन दिए हैं, पर सड़क का निर्माण नहीं हो पाया।

नाली नहीं बनी, पहाड़ का पानी सड़क पर बहता है

घाटी वाली पर सड़क के किनारे नाली का निर्माण नहीं किया है। बरसात के दिनों में पहाड़ से गिरने वाला पूरा पानी फाेर्स से सड़क पर ही बहता है। पानी के बहाव के कारण ही टिक नहीं पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि घाटी में टिकाउ सड़क किनारे नाली के साथ सीसी रोड बनाना जरूरी है। तभी सड़क टिक पाएगी। नहीं तो हर बार रिपेयरिंग के दूसरे ही साल सड़क का यही हाल होगा।

पहले नक्सली दृष्टि से बेहद संवेदनशील थे यह गांव
गजमा, लुखी व मधवा 10 साल पहले तक नक्सली दृष्टिकोण से संवेदनशील थे। कोयल जोन के नक्सली आकर रहते थे। झारखंड में वारदातों को अंजाम देने के बाद नक्सली सुरक्षित ठिकानों के रूप में उपयोग करते थे। चहलकदमी से इन गांव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा था। सीआरपीएफ की तैनाती होने के बाद इन गांव तक पहुंचने के लिए सड़क बन सकी थी, पर एक बार सड़क बन जाने के बाद दुबारा सड़क की मरम्मत या रिनुवल नहीं हो पाने के कारण अब फिर से पाठ इलाके के गांव तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है।

आलू, टाउ, रामतिल, कोदो कुटकी की पैदावार क्षेत्र
गजमा, मधवा व लुखी इलाके में आलू, रामतिल, टाउ, कोदेा व कुटकी जैसी फसलों की पैदावार अधिक होती है। बरसात के शुरुआती दिनों से बाहरी व्यापारियों का इन इलाकों में आना-जाना होता है। बरसात फर सड़क पर ट्रैफिक ना के बराबर रहती है, पर जब फसल तैयार हो जाते हैं तो फिर से वाहन इन गांव की ओर पहुंचते हैं। कई व्यापारी स्थानीय किसानों को इन फसलों का बीज देकर चले आते हैं। जब फसल तैयार हो जाती है तो फसल की ढ़ुलाई के लिए पिकअप लेकर व्यापारी इन इलाकों में पहुंचते हैं, पर सड़क खराब होने के कारण इस साल इन इलाकों में बहुत कम व्यापारी पहुंचे थे।

रिनुवल में मंजूरी मिली होगी तो बन जाएगी सड़क
सड़क की मेंटनेंस के लिए अलग से कोई फंड विभाग के पास नहीं होता है। जिले में कई सड़कों के रिनुवल की मंजूरी मिली है। यदि यह सड़क भी इसमें शामिल है तो बरसात के बाद सड़क बन जाएगी।”
राहुल कश्यप, ईई, पीएमजीएसवाई।

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