छग में इस बार मानसून का गेट-वे ही सूखा:बस्तर में अच्छी बारिश न होने से किसानों की बढ़ी चिंता, 15 जुलाई तक नहीं कर पाए रोपाई तो होगा नुकसान

- मौसम विभाग का अनुमान- बारिश होने के बन रहे आसार
छत्तीसगढ़ में बस्तर को मानसून का द्वार कहा जाता है। प्रदेश में मानसून यहीं से प्रवेश करता है। पहली बारिश भी यहीं होती है। इस साल भी यहां 10 जून को मानसून ने दस्तक तो दे दी थी, लेकिन अब तक किसी भी इलाके में अच्छी बारिश नहीं हुई है। बुधवार को भी कहीं चिलचिलाती धूप निकली तो कहीं बादल छाए रहे। अब किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। हालांकि, मौसम विभाग द्वारा रोजाना मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी किया जा रहा है, लेकिन ऐसा लग रहा है मानों इस बार मानसून बस्तर से रूठ गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अब बुधवार शाम से अच्छी बारिश हो सकती है।
किसान बोले- नहीं हुई बारिश तो कैसे करेंगे रोपाई
बस्तर संभाग में बारिश नहीं होने से अब किसान भी मायूस हो गए हैं। मौसम वैज्ञानिक अनिल ठाकुर के अनुसार 15 जुलाई तक धान की रोपाई का कार्य किया जाना है। लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से अब तक किसान रोपाई का काम नहीं कर पाए हैं। किसान कुमो, शैलेष, राजू और रमेश ने बताया कि पिछले साल जुलाई के पहले सप्ताह में ही अच्छी बारिश हो गई थी, लेकिन इस बार बारिश का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अब फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मौसम खेल रहा आंख मिचौली का खेल
बस्तर में मौसम लगातार आंख मिचौली का खेल, खेल रहा है। दोपहर 3 बजे तक कई इलाकों में चिलचिलाती हुई धूप निकली तो कहीं काले घने बादल नजर आए। लेकिन सुबह से किसी भी इलाके में बारिश नहीं हुई। 6 जुलाई मंगलवार को भी जगदलपुर व कोंटा समेत एक दो जगहों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी जिले में हल्की बारिश भी नहीं हुई। हालांकि, बारिश का मौसम जरूर बना था।
4 घंटे के अंदर होगी बारिश
मौसम वैज्ञानिक एपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका झारखंड से उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। एक दूसरा द्रोणिका उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक दक्षिण बिहार, उत्तर झारखंड और गंगेटिक पश्चिम बंगाल होते हुए मध्य समुद्र तल पर स्थित है। एक चक्रीय चक्रवाती घेरा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। उन्होंने पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया कि बुधवार की शाम से बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव व बस्तर में एक या दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा व आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है।
किसानों के लिए एडवाइजरी
- जुलाई के प्रथम सप्ताह में वर्षा की संभावना बनी हुई है, 7 जुलाई को उमस के साथ गर्मी बनी रहेगी।
- जिन इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था है, वे समय का उपयोग कर बुवाई एवं रोपाई हेतु नर्सरी तैयार कर सकते हैं।
- वर्तमान मौसम खरीफ सब्जियों जैसे टमाटर, बैगन, मिर्च इत्यादि के थरहा तैयार करने हेतु बुआई के लिए अनुकूल है, इसे देखते हुए किसानों को लगभग 6 इंच ऊंची क्वारियां बनाकर बीजों की बुआई कर सकते हैं।
- बिना बंधान वाले खेतों में मूंग, उड़द व तिल की बोनी की जा सकती हैं ,जल निकास की उचित व्यवस्था करें
- हल्की जमीनों में 100 से 115 दिनों में पकने वाली किस्में दंतेश्वरी, पूणिमा, इंदिरा बारानी धान-1, समलेश्वरी, MTU-1010, लगाएं यदि प्रमाणित बीज उपलब्ध न हो तो किसान इन किस्मों का स्वयं का बीज 17 प्रतिशत नमक के घोल एवं बाविस्टीन से उपचार करके बोनी करें।
- वर्षाकालीन सब्जियों हेतु पौध तैयार करें, कद्दू , लौकी, करेला इत्यादि बेल वाली फसलों को बाड़ी में लगाएं।
- पशुओं को गलघोटू एवं एक टांगिया बीमारी से बचाव हेतु टीका लगवाएं।



