धान खरीदी के 16 दिन बाकी, अब अफसर कह रहे बड़े उद्योगों से बारदाना खरीदेंगे

बिलासपुर। टोकन लेकर सोसायटी पहुंचने वाले किसानों को अब बारदाना लेकर आऩे कहा जा रहा है। बिना बारदाने के बिलासपुर जिले के लोहर्सी, ओखर, जैतपुरी, चिल्हाटी सहित कई केंद्रों में धान खरीदी बंद है। इससे अन्नदाता किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। साल भर की मशक्कत के बाद अपनी उपज को बेचने के लिए टोकन के बाद अब उसे बारदाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। आलम यह है कि बाजार में बारदाने मिल नहीं रहे हैं। मशक्कत के बाद किसानों को बारदाना 35-40 रुपए में मिल रहा है। मुनाफाखोर इसके 50 रुपए तक वसूल रहे हैं। सोसायटी प्रबंधकों द्वारा किसानों को यह कहा जा रहा है कि बारदाने की एवज में उन्हें 15 रुपए लौटाए जाएंगे। यह पैसे कब मिलेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बता दें कि जिले में 5.87 लाख बारदाने की कमी है। बारदाने की कमी शुरू से रही है, परंतु उसकी व्यवस्था किए बिना ही किसानों को टोकन बांट दिए गए। अब किसानों को बारदाने के लिए भटकना पड़ रहा है। हैरत की बात यह है धान खरीदी के 44 दिन बाद उच्चाधिकारी कह रहे हैं कि बड़े उद्योगों से बारदाने खरीदेंगे। अगले 16 दिनों में 4 लाख 22 हजार 994 क्विंटल धान खरीदना है। इसके लिए 10 लाख 57 हजार 485 बारदाना की जरूरत है लेकिन अभी समितियों में 4 लाख 70 हजार 485 बारदाने ही हैं। यानी 5 लाख 87 हजार बारदानों की कमी है। जानकारी के मुताबिक सभी केंद्रों में मांग के अनुरूप बारदाना नहीं भेजने की वजह से अव्यवस्था हो रही है। बारदाने के िलए किसान भटक रहे हैं। इधर खाद्य नियंत्रक एच. मसीह का दावा है कि सभी जगह खरीदी हो रही है। फिर से पीडीएस व मिलरों से बारदाना ले रहे हैं। सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी आशीष दुबे का भी कहना है कि धान खरीदी सभी केंद्रों में नियमित रूप से हो रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब जरूरत के मुताबिक बारदाने नहीं हैं, तो खरीदी कैसे हो रही है?
इन केंद्रों में खरीदी बंद
काेटा क्षेत्र के आदिवासी सेवा सहकारी समिति नंगचुई, धूमा, बड़े करगी, छोटे करगी, नवागांव आदि धान केंद्रों में बारदाना की कमी के कारण खरीदी बंद है। बारदाना मंगाया गया है। इसी तरह मस्तूरी इलाके के लोहर्सी, ओखर, जैतपुरी, चिल्हाटी में भी खरीदी बंद है।
प्लास्टिक बारदाना भी खपाया, कमी पूरी नहीं हुई
जिले में इस बार 43 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए 1 करोड़ 7 लाख 50 हजार बारदानों की जरूरत थी लेकिन सबसे अंत में आए 1 लाख 45 हजार प्लास्टिक बारदानों को भी मिलाकर यह एक करोड़ एक लाख 63 हजार बारदाना ही हुआ। यानी 5 लाख 87 हजार बारदानों की कमी अभी बनी है। अब तक 90 हजार 389 किसानों से 38 लाख 77 हजार 6 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। चूंकि एक क्विंटल में ढाई बारदाना लगता है। यानी अब तक 96 लाख 92 हजार 515 बारदाना खप चुका है।
डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य सचिव
सवाल – बारदानों की सप्लाई क्यों नहीं हो रही है?
– बारदानों की सप्लाई की जा रही है। कहीं-कहीं छिटपुट कमी हो सकती है।
सवाल -जब बारदाना नहीं था तो किसानों को टोकन क्यों दिया गया?
– कुछ जगह सूचना मिल रही है। मैं चेक करवाता हूं।
सवाल -किसानों को बारदाना लाने कह रहे हैं पर मार्केट में यह 35 से 50 रुपए तक में मिल रहा है?
– इसका हल निकाल रहे हैं। कोशिश कर रहे हैं कि बड़े संगठित उद्योगों से बारदाना लें। इसके लिए कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं।



