जरा हटकेस्वास्थ्य

सेहत के साथी हैं ‘श्रीअन्न’, जानें अलग-अलग धारणाओं में कितना फ़ायदा होता है ये सुपरफूड्स

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विवेक शुक्ला

एक दौर था, जब कई लोग पालतू अनाज को ‘गरीबों के अनाज’ कहते थे, लेकिन अब इस गलत धारणा को गलत माना जा रहा है। हाल ही में विश्व के प्रभावशाली देशों के संगठन जी-20 के भारत में हुए सम्मेलनों की कड़ी में ऐसे अनाजों के विभिन्न खातों के अति विशिष्ट लोगों के विशेष सर्विंग की प्रविष्टियां, जिनकी झलक जी-20 के निकट भविष्य में देश में फिर से आयोजित हुई वाले अन्य सम्मेलनों में भी जारी होंगे।

किसे कहते हैं मोटे अनाज

सरल शब्दों में कहें तो व्हीट और चावल को छोड़कर जय, बजरा, रागी, ज्वार, जौ, जुनी, कुटकी या कोदो और मक्का आदि को अनाज (मिल्ट्स) के रूप में शुमार किया जाता है। ये मोटे अनाज कहने का एक कारण यह भी होता है कि गेहूं और चावल की तुलना में ऐसे अनाज की सतह पर संकट के रूप में नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में मुख्य रूप से बजरा, ज्वर, जौ एवं रागी आदि अनाजों की फसल बड़े पैमाने पर होती है। गेहूं और चावल की तुलना में अनाजों की सफलता को तैयार करने में पानी की खपत कम होती है और ये कम काम कर्जा में भी स्पष्ट होते हैं। यह नहीं, इसके प्रत्येक खंड में विभिन्न प्रकार के रासायनिक खादों की कोई आवश्यकता नहीं है।

आयुर्वेद में लाभार्थियों का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार, अनाज वात और कफ दोष को संतुलित करने में सहायक हैं। इस कारण वात से संबंधित समस्याएं, जैसे- गठिया (अर्थराइटिस), हड्डियों और जोड़ों से संबंधित परेशानी आदि और कफ से संबंधित समस्याएं, जैसे- जुकाम व खांसी और फेफड़ों से संबंधित अन्य परेशानियां, जैसे- दमा आदि में दांव लगाने का दावा करती हैं . आयुर्वेद के अनुसार, दर्ज अनाज पाचन तंत्र को वाणी रखने, शरीर की बीमारी कहीं शक्ति बढ़ाने, मधुमेह और हृदय ग्रहण की रोकथाम में सहायक होते हैं, पर हर व्यक्ति के वात, पित्त और कफ से संबंधित दोष अलग-अलग होते हैं। इसके अलावा उम्र भी अतिरेक है। ऐसे में प्राप्तकर्ताओं के नुस्खे आयुर्वेद विशेषज्ञों से परामर्श लेकर बेहतर है।

जारी शोध और अध्ययन हैं

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिलिट्स रोसेट (आइआइ पहलू), हैदराबाद के अनुसार दाने मधुमेहरोधी और कैंसररोधी तत्वों से भी परिपूर्ण हैं। उच्च रक्तचाप और दिल की प्रतिक्रिया से घबराहट में अनाजों का सेवन बेहद गलत होता है। इस संदर्भ में शोध अध्ययन जारी हैं।

पालतू जानवरों का पाचन तंत्र पर प्रभाव

  • सब्जियों और उनके द्वारा बनाए गए नाश्ते से कब्ज की समस्या नहीं रहती है।

  • होटलों में अनाज के सेवन से शरीर के लिए हानिप्रद जीवाणुओं को दूर करने में मदद मिलती है और लाभ जीवाणुओं की संख्या बढ़ रही है। अगर किसी को पाचन तंत्र से संबंधित इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी बीमारी है और इस बीमारी का कारण कब्ज है, तो भिखारियों का सेवन अधिक होता है।

  • ऐसे अनाज के सेवन से आंतों में सूजन और संक्रमण (जिसे चिकित्सीय भाषा में कोलाइटिस कहा जाता है) की आशंकाएं भी कम हो जाती हैं।

  • फैट की मात्रा नगण्य और फाइबर से भरपूर होने के कारण आंत के कैंसर होने का खतरा कम होता है।

विभिन्न प्रकार के ग्राह्य हैं

  • आपाधापी में : अनाजों में बाजारा आदि में आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। शरीर में आयरन की कमी से रक्ताल्पता या जलाशय की समस्या पैदा होती है। टिक्स की रोकथाम या फिर इसके इलाज के दौरान पोखरों का सेवन इस समस्या को दूर करने में सहायक है।

  • आदत पर नियंत्रण : विश्व ओबेसिटी फेडरेशन के एक अध्ययन के अनुसार, मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग, अर्थराइटिस आदि का एक प्रमुख कारण है। घरेलू अनाज जैसे बाजारा, रागी और होती जय (ओट्स) आदि में फाइबर शॉपिंग मात्रा में पाया जाता है और इनमें वसा (फैट) की मात्रा नागानी है। इस कारण अनाजों का सेवन संबंधी गड़बड़ी को नियंत्रित करने में अन्य उपाय जैसे- व्यायाम आदि के अलावा तथ्य सिद्ध होता है।

  • मधुमेह रोगी के लिए अत्यंत घातक : अंतरराष्ट्रीय पर्यटक संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन पदार्थों का ग्लाइसेमिक कम होता है, वे मधुमेह के लिए अत्यधिक अतिसंवेदनशील होते हैं। घरेलू अनाज जैसे रागी, जय और बजरा आदि का ग्लाइसेमिक संघटन भी कम होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो अनाज खाने वाले रक्त में शुगर बढ़ने की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

  • हृदय रोगी के लिए हितकर : स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डाइटिशियन के अनुसार, राशनों में जय (इससे बनने वाला सिया), रागी, बजरा और ज्वॉय आदि से निर्मित उत्पाद या व्यंजन दिल से आते हैं, क्योंकि इनमें से कई मात्रा में पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। फाइबर के अलावा इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, मैग्नीशियम और पोटेशियम भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है और इसके साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है, इसलिए सेवन से हृदय धमनी रोग (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) की रोकथाम में मदद मिलती है।

जय (ओट्स) के डिजाइन

मधुमेह और ह्रदय की पुष्टि में जय भ्रम होता है। जो लोग जय को अपने दैनिक आहार में शामिल करते हैं, उनमें से कुछ और हृदय रोग होने का खतरा उन लोगों की तुलना में कम होता है, जो इसे नहीं लेते हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जिसके गुण इसे आसानी से पचा लेते हैं। जय में आयरन, जिंक, कैल्शियम और विटामिन बी भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। ओट्स में फोलिक एसिड भी पाया गया है, जो बच्चों के विकास के लिए उपयोगी है।

दुरुपयोग विधि : खीर, उपमा खिचड़ी, ओट्स से बनी कुकीज और ओट्स ब्रेड आदि के रूप में।

जय के पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 389 किलो कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 66 ग्राम

  • प्रोटीन : 16.89 ग्राम

  • कैल्शियम : 54 मिलीग्राम

  • आयरन : 3.8 मिलीग्राम

  • फाइबर : 3.5 ग्राम

बाजारे (पर्ल मिलेट) का महत्व

ग्लाइसेमिक कम होने की वजह से बजरा ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और ब्लड शुगर (ब्लड शुगर) के स्तर को नियंत्रित करने में है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, आयरन और प्रोटीन आदि पोषक तत्व मिलते हैं। यह हमारे शरीर से पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करता है।

उपयोग विधि : चपाती, खिचड़ी, लड्डू आदि के रूप में।

बजरे के पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा :347.9 किलो कैलोरी

  • : 5.43 ग्राम प्रोटीन

  • कैल्शियम :27.35 मिलीग्राम

  • कार्बोहाइड्रेट :61.7 ग्राम

  • आयरन :6.42 मिलीग्राम

  • कुल फाइबर :11.49 ग्राम

रागी मिलेट की खूबियां

मधुमेह-टाइप 2 से ग्रस्त लोगों के ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में यह बहुत सहायक है। यह वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसमें जटिल कार्बोहाइड्रेट मिलते हैं। फाइबर और प्रोटीन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। रागी प्रेग्नेंसी महिलाओं के लिए भी अतिसंवेदनशील होती है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी लाभ होता है।

उपयोग विधि : खीर, हलवा, इडली, उत्तपम और चपाती आदि.

रागी के पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 328 किलो कैलोरी

  • प्रोटीन : 7.3 ग्राम

  • कार्बोहाइड्रेट : 72 ग्राम

  • कैल्शियम : 344 मिलीग्राम

  • आयरन : 3.9 मिलीग्राम

  • फाइबर : 3.6 ग्राम

  • वसा : 1.3 ग्राम

  • पोटैशियम : 408 मिलीग्राम

जाली मिलेट (फॉक्सटेल मिलेट)

इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन आदि पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। पोटैशियम में पोटैशियम भी मौजूद होता है, जो उच्च रक्तचाप और हृदय दोष को कम करता है। यह भी मधुमेह टाइप-2 को नियंत्रित करने में सहायक है। यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर फाइटिंग में सहायक है। इसमें पोषक तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर में रक्त की कमी को दूर करने में सहायक होता है।

दुरुपयोग विधि : चपाती, लड्डू और खिचड़ी आदि के रूप में।

रोशनाई में प्रकाश तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 351 के कैलोरीज

  • प्रोटीन : 11.2 ग्राम

  • कार्बोहाइड्रेट : 63.2 ग्राम

  • कैल्शियम : 31 मिलीग्राम

  • आयरन : 2.8 ग्राम

  • फाइबर : 3.5 ग्राम

  • वसा : 4 ग्राम

कुट्टू के गुण

इसमें बी कांप्लेक्स और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कुट्टू में जाने वाले पोषक तत्व ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड (एक प्रकार की वसा जो हृदय की अधिलेखित में जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कालांतर में दिल का दौरा पड़ सकता है) को कम करने में सहायक हैं। यह सातवीं किडनी स्टोन, दमा और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक है।

उपयोग विधि : तहरी, हलवा और पूड़ी आदि.

कुट्टू की विशेषता (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 323 के कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 65.1 ग्राम

  • प्रोटीन : 10.3 ग्राम

  • कैल्शियम : 64 मिलीग्राम

  • आयरन : 15.5 मिलीग्राम

  • कुल फाइबर : 8.6 ग्राम

कुटकी लिवर के लिए हेल्दी

कुटकी में कुटुकिन नामक एंजाइम पाया जाता है, जो लिवर की कार्य प्रणाली को प्रमाणीकरण के रूप में संचालित करने में सहायक है। इसमें कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। फ्लूमिनी टाइप-2, किडनी और पेशाब से संबंधित परेशानी करने में कुट का सहायक है। कुट का उच्च रक्तचाप बालों के लिए भी खतरा है।

उपयोग विधि : खीर, उपमा, खिचड़ी, इडली, दोसा और चीला आदि के रूप में।

कुटकी में पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 307 किलो कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 65.5 ग्राम

  • प्रोटीन : 6.2 ग्राम

  • कैल्शियम : 20 मिलीग्राम

  • आयरन : 5 मिलीग्राम

  • विवेक : 4.4 ग्राम

  • फाइबर : 9.8 ग्राम

मकई (कॉर्न) का प्रतिनिधित्व करता है

मकई में फाइबर की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। इस कारण यह वजन को नियंत्रित करने में सहायक है। नाश्ते में मकई को दलिया के रूप में लेने पर यह उच्च रक्तचाप और हृदय की प्रतिक्रिया को रोकने में भी सहायक है। आमाशय के अल्सर से ग्रस्त लोगों के लिए भी यह पथ्य है। मकई को एंटी एलर्जिक माना जाता है। मूत्र से संबंधित होने का सेवन गलत होता है।

उपयोग विधि : इडली, कुकीज, चपाती, मकई का सूप और पराठे के रूप में मकई।

मकई के पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 342 के कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 26.2 ग्राम

  • प्रोटीन : 11.1 ग्राम

  • वसा : 3.6 ग्राम

  • कैल्शियम : 27.35 मिलीग्राम

  • आयरन : 2.3 मिलीग्राम

  • फाइबर : 0.8 ग्राम

जैविक स्वास्थ्य के लिए लाभ

ज्वर ग्लूटेन अनुपयोगी है। व्हीटी में ग्लूटेन नामक तत्व पाया जाता है। कुछ लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है, जिसके कारण उन्हें सीलिएक नामक रोग हो जाता है। ऐसे लोगों के लिए गेहूं के स्थान पर ज्वर का उपभोग करना भ्रम होता है। इसमें फाइबर मात्रा में मिलते हैं।

उपयोग विधि : चपाती, दलिया, खिचड़ी, रोस्टेड ज्वर।

ज्वर में पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 349 किलो कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 72.6 ग्राम

  • प्रोटीन : 10.4 ग्राम

  • कैल्शियम : 25 मिलीग्राम

  • आयरन : 4.1 मिलीग्राम

  • वसा : 1.9 ग्राम

जौ (बार्ली) का महत्व

उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए खान-पान में जौ से बने विभिन्न सूचनाओं का सेवन प्रचलित है। जौ ब्लड कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर यानी रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक है। यह मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत है। यह वजन नियंत्रण में भी सहायक है, क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसके सेवन से पाचन क्रिया सही रहती है।

उपयोग विधि : सूप, सलाद, चपाती और बिस्किट आदि के रूप में।

जौ के पोषक तत्व (100 ग्राम)

  • ऊर्जा : 336 के कैलोरी

  • कार्बोहाइड्रेट : 69.6 ग्राम

  • प्रोटीन : 11.5 ग्राम

  • कैल्शियम : 26 मिलीग्राम

  • आयरन : 8 मिलीग्राम

  • फास्फोरस : 296 मिलीग्राम

  • कुल फाइबर : 15.64 ग्राम

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