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क्या आप जानते है धरती पर पानी कहां से आया? उल्कापिंड ने खोला राज, जानिए कैसे…

पृथ्‍वी पर पानी कहां से आया? क्‍या इस सवाल का जवाब उस उल्कापिंड में छुपा है, जो ब्रिटेन में एक ड्राइव-वे पर क्रैश लैंड हुआ था. जर्नल साइंस एडवांसेज में 16 नवंबर को पब्लिश हुए एक नए विश्लेषण ने इस थ्‍योरी को समझाने की कोशिश की है. अंतरिक्ष में भी पानी मौजूद है, इस बात की पुष्टी कई वैज्ञानिक शोध में बताया गया है. चंद्रमा से लेकर मंगल पर बर्फ मिलने का दावा किया जा चुका है

अब वैज्ञानिकों को एक उल्कापिंड के भीतर नमक के कुछ क्रिस्टल मिले हैं, जिनमें पानी पाया गया है. जानकारी के मुताबिक ये उल्कापिंड एक ऐस्टरॉइड का हिस्सा था, जो धरती पर गिरा था. जब वैज्ञानिकों ने इस उल्कापिंड का अध्ययन किया तो पाया कि इसमें मौजूद नमक के कण कहीं और से आए हैं

पिछले साल क्रैश लैंड हुए उल्‍कापिंड को वैज्ञानिकों ने विंचकोम्ब उल्कापिंड नाम दिया है. लंदन में नेशनल हिस्‍ट्री म्‍यूज‍ियम के रिसर्चर्स ने इस अंतरिक्ष चट्टान की जांच की. उन्होंने पाया कि इसमें पृथ्वी के पानी के जैसा ही पानी है. वैज्ञानिकों की यह स्‍टडी उस सिद्धांत का समर्थन करती है, जो कहता है कि पृथ्वी को एस्‍टरॉयड्स की वजह से पानी का विशाल भंडार मिला है

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को कैल्साइट क्रिस्टल मिले जिनमें 15 फीसदी कार्बन डायऑक्साइड और बेहद कम मात्रा में तरल पदार्थ की मौजूदगी थी. इससे जो परिणाम सामने आए हैं वो बताते हैं कि पुराने कार्बनेशस कॉन्ड्राइट क्लास से बने इन उल्कापिंडों में पानी और कार्बन डायऑक्साइड की मौजूदगी हो सकती है. सौरमंडल की शुरुआत के समय के ऐस्टरॉइड के भीतर पानी की मौजूदगी को वैज्ञानिक बेहद अहम खोज मान रहे हैं. रिसर्चर इस सैंपल पर अगले कुछ वर्षों तक काम करते रहेंगे. उन्‍हें कई और जानकारियां मिलने की उम्‍मीद है. इससे हमारे सौर मंडल की उत्पत्ति के बारे में भी पता चलने की उम्‍मीद है

ग्रह विज्ञानी लंबे समय से इस बात को जानना चाह रहे हैं कि आखिर पृथ्वी के महासागरों में इतना पानी कैसे आया था. कुछ सिद्धांतों ने सुझाया है कि ऐसा पानी वाले क्षुद्रग्रहों की बारिश के कारण हुआ होगा जो 4.6 अरब साल पहले पृथ्वी पर हुई थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि पृथ्वी पर कुछ पानी ‘सी’ प्रकार के क्षुद्रग्रह से आया था.

शोधकर्ताओं का यह भी मानना रहा कि इसके साथ ही पृथ्वी पर पानी एक और हलके आइसोटोपिक स्रोत से आया होगा जो सौरमंडल में कहीं और था. नई पड़ताल से पृथ्वी पर पानी पहुंचने और बड़ी तादाद में सतह को घेरने लायक मात्रा में होने के आसपास के कई रहस्यों का भी खुलासा हो सकेगा. वैज्ञानिक यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि इस अध्ययन के नतीजे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में वायु रहित ग्रहों पर पानी खोजने में मददगार हो सकेंगे.

 

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