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भाईदूज: इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। यह भाई-बहनों के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।

कवर्धा: इस साल दिवाली पर सूर्यग्रहण लगने के कारण लोगों के मन में तिथियों को लेकर कंफ्यूजन है। ऐसे में लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर भाई दूज का त्योहार किस दिन मनाया जाएगा। जानें 26 या 27 अक्टूबर किस दिन भाईदूज मनाना रहेगा सही-

दोपहर के समय होती है भाईदूज की पूजा-
यम द्वितीया यानी भाईदूज के दिन यमराज अपनी बहन के घर दोपहर के समय आए थे और बहन की पूजा स्वीकार करके उनके घर भोजन किया था। वरदान में यमराज ने यमुना को कहा था कि भाई दूज यानी यम द्वितीया के दिन जो भाई अपनी बहनों के घर आकर उनकी पूजा स्वीकार करेंगे और उनके घर भोजन करेंगे उनका अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।


शास्त्रों के अनुसार

भाईदूज के दिन यमराज, यमदूज और चित्रगुप्त की पूजा करनी चाहिए। इनके नाम से अर्घ्य और दीपदान करना चाहिए

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