सरकार से कर्मचारी विरोधी फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग

टीचर्स एसोसिएशन ने वेतनवृद्धि में रोक को कहा अनुचित:छत्तीसगढ़ टीचर्स
बोड़ला sdm को मांग पत्र सौपा

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कवर्धा, 2 मई 2020 को छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने वित्त विभाग द्वारा मितव्ययिता के नाम पर वर्ष में एक बार मिलने वाले वेतनवृद्धि में रोक लगाने के आदेश को कर्मचारियों को हतोत्साहित करने वाला तथा कर्मचारी विरोधी आदेश करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग किया है. कोविद-19 के संक्रमण से बचाव हेतु लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राजस्व प्राप्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए राजस्व प्राप्ति की भरपाई कर्मचारियों के वेतनवृद्धि को रोककर करना सर्वथा अनुचित व असहनीय है. शासन के पास राजस्व प्राप्ति के अन्य माध्यम भी है, उनका उपयोग सरकार को करना चाहिए. कोरोना संक्रमण काल में निम्न वर्ग को विभिन्न प्रकार के लाभ व सुविधाएं दी जा रही है. वहीं उद्योग व्यापार के लिए सहायता पैकेज जारी किया गया है. कर्मचारियों के हिस्से में वर्ष में एक बार वेतनवृद्धि का समय आता है, उस पर रोक लगाने से मंहगाई के दौर में उनके परिवार की व्यवस्था बिगड़ जाएगी. आखिर सरकार कर्मचारियों के लिए ऐसे कठोर निर्णय कैसे ले सकती है? कर्मचारी विरोधी इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.
जिले सहित प्रदेश के सभी कर्मचारी वर्तमान कोरोना संक्रमण काल में भी इस महामारी से लड़ने हर स्तर पर सहयोग कर रहे हैं. कर्मचारियों ने अपने एक दिन का वेतन भी कोरोना से लड़ाई में सहायता हेतु दिया है. ऐसे में उनके वेतनवृद्धि को रोकने का मतलब कर्मचारियों के कार्य करने की क्षमता पर अवरोध उत्पन्न करना है.
मंहगाई भत्ता पर है अघोषित रोक–राज्य सरकार मंहगाई भत्ता पर पहले से ही अघोषित रोक लगाया हुआ है, उसे जारी करने के बजाय वेतनवृद्धि रोककर वेतन को स्थिर करने का आदेश अव्यवहारिक है.
बीमा के बगैर ही कोरोना की लड़ाई में बन रहे सहभागी– वर्तमान में कोरोना की लड़ाई में सरकारी कर्मचारी लगातार जुटा हुआ है. चाहे क्वारेन्टीन सेंटर में ड्यूटी हो या फिर प्रवासी श्रमिकों को लाने ले जाने का काम हो. सरकारी कर्मचारियों से कोरोना से संबंधित हर छोटे बड़े काम लिया जा रहा है. कोरोना वायरस से संक्रमण का खतरा होने पर भी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को 50 लाख रुपये का बीमा कव्हर नहीं दिया जा रहा है, उल्टे अब कर्मचारियों के वेतनवृद्धि में रोक लगा दिया गया है, जबकि वर्तमान समय में सरकारी कर्मचारियों के हित में निर्णय लेकर उनके मनोबल को बढ़ाने की आवश्यकता है.
सरकार का विरोधाभासी निर्णय–-प्रदेश सरकार ने निजी स्कूल के कर्मचारियों का पूर्ण वेतन देने का निर्देश दिया है. इसी तारतम्य में जिला शिक्षा अधिकारी ने विगत 18 मई को जिले के निजी स्कूलों के प्राचार्य के नाम पत्र जारी करते हुए प्रत्येक शाला के स्टाफ का पूण वेतन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूल संचालक द्वारा आदेश निर्देश का पालन नहीं करने पर शाला की मान्यता समाप्त किये जाने की कार्यवाही की जा सकेगी. इस प्रकार निजी स्कूल के कर्मचारियों का वेतन नहीं काटने का निर्देश देने वाले सरकार ने खुद अपने ही कर्मचारियों व शिक्षकों की वेतन कटौती करने का निर्देश देकर विरोधाभासी कार्य करने में लगा हुआ है,जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है.उपस्थित शिक्षकगण राजेश तिवारी ब्लाक अध्यक्ष,नकुल वर्मा, रघुनंदन चंद्रवंशी ,सुजीत गुप्ता ,कमलेश तिवारी ,नंद कुमार सोनी ,वीरेंद्र सिंह ठाकुर ,प्रहलाद तिलकवार ,मिट्ठू लाल साहू ,पुनाराम पनागर, संजय सभी शिक्षक मौजूद रहे



