कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

3 तहसील के लोगों की जिला बनाने की मांग:अंतागढ़, भानुप्रतापपुर और कोयलीबेड़ा के लोग कर रहे आंदोलन, 15 अगस्त के बाद से गरमाया माहौल; रोजाना रैली भी निकाल रहे

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में इन दिनों माहौल काफी गरमाया हुआ है। कांकेर के तीन तहसील के लोग अपनी-अपनी तहसील को जिला बनाने के लिए लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। एक तरफ जहां अंतागढ़ और भानुप्रतापपुर के लोगों में जिला बनाने के लिए जंग छेड़े हुए हैं तो वहीं कोयलीबेड़ा (पखांजूर) के लोग भी मैदान में उतर गए हैं। 15 अगस्त को CM भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में 4 नए जिलों की घोषणा की थी, जिसके बाद से ही कांकेर जिले में माहौल गरमाया हुआ है।

कई पंचायतों के लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
कई पंचायतों के लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

कांकेर जिले में है 7 तहसील
क्षेत्रफल की दृष्टि से कांकेर जिला काफी बड़ा है। यहां की आबादी लगभग 5,91,579 है। जिले में वर्तमान में कुल 7 तहसील हैं, जिनमें कांकेर, चारामा, नरहरपुर, दुर्गकोंदल, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ व कोयलीबेड़ा (पखांजूर) शामिल हैं। इनमें कोयलीबेड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 102.7 किमी दूर है। अंतागढ़ 75.2 किमी व भानुप्रतापपुर की दूरी 48.5 किमी है। यह तीनों तहसील कांकेर जिला मुख्यालय से काफी दूर हैं। जिला मुख्यालय जाने कोयलीबेड़ा के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आमाबेड़ा के लोग अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर कई दिनों से धरना में बैठे हुए हैं।
आमाबेड़ा के लोग अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर कई दिनों से धरना में बैठे हुए हैं।

कई सालों से चल रही अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग
अंतागढ़ तहसील को जिला बनाने की मांग पिछले कई सालों से चल रही है। लेकिन 15 अगस्त के बाद से एक बार फिर यहां आवाज उठी है। लंबे समय के बाद कई पंचायतों के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। पिछले कई दिनों से आमाबेड़ा के लोग भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लगातार रैली व धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। अंतागढ़ के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि, अंतागढ़ कांकेर जिले के मध्य में स्थित है। यदि इसे जिला बनाया जाता है तो इसका फायदा भानुप्रतापपुर व कोयलीबेड़ा के लोगों को भी मिलेगा।

अंतागढ़ तहसील को जिला बनाने की मांग पिछले कई सालों से चल रही है।
अंतागढ़ तहसील को जिला बनाने की मांग पिछले कई सालों से चल रही है।

अंतागढ़ से भानुप्रातापपुर की दूरी लगभग 30 किमी है। वहीं पखांजुर 40 किमी, रावघाट 26 किमी, आमाबेड़ा 29 किमी दुर्गुकोंदल 28 किमी की दूरी पर स्थित है। यदि अंतागढ़ को जिला बनाया जाता है तो इन सभी इलाके के लोगों को काफी फायदा मिलेगा। फिलहाल कांकेर जिला मुख्यालय से ये सभी इलाके की दूरी बहुत ज्यादा है।

भानुप्रतापपुर को भी जिला बनाने की उठी मांग
अंतागढ़ व भानुप्रतापपुर के लोगों में अब आपसी विवाद की स्थित भी बन रही है। क्योंकि जिला बनने के लिए भानुप्रतापपुर भी लाइन में खड़ा हुआ है। यही वजह है कि पिछले कई दिनों से इन दोनों तहसील के लोगों के बीच में घमासान चल रहा है। भानुप्रतापपुर इलाके के कई पंचायत के लोग भी अब सीधे सड़क पर उतर कर आंदोलन करने लग गए हैं। भानुप्रतापपुर की सीमा गरियाबंद जिले से भी लगी है। यह इलाका बेहद पास है।

कोयलीबेड़ा भी लगा कतार में
दो तहसील की जिला बनने की लड़ाई में अब कोयलीबेड़ा भी कतार में आकर खड़ा हो गया है। कोयलीबेड़ा की दूरी कांकेर से लगभग 102.7 किमी है। यहां के रहवासियों को कांकेर जाने में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह इलाका अबूझमाड़ से भी लगा हुआ है। कोयलीबेड़ा को जिला बनाने के लिए यहां भी लोगों ने आवाज उठाई है। फिलहाल बड़ी लड़ाई भानुप्रतापपुर और अंतागढ़ तहसील के बीच में चल रही है।

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