रायगढ जिला

हॉलमार्किंग के विरोध में व्यापारी, बंद रहीं सराफा दुकानें:व्यापारी बोले-एचयूआईडी की जटिल प्रक्रिया से चौपट हो जाएगा कारोबार, 1 सितंबर से जरूरी होगी ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग

सोने चांदी के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग यूनिक आईडी (एचयूआईडी) नियम के विरोध में सोमवार को जिले के सराफा कारोबारियों ने कारोबार बंद रखा। व्यवसायियों ने एचयूआईडी की जटिल प्रक्रिया से कारोबार चौपट होने की आशंका जताई है। व्यापारियों के अनुसार इसकी अनिवार्यता तय होने के बाद रिटेलरों का पूरा दिन मानक ब्यूरो को जानकारी देने में ही बीत जाएगा। ऐसे में वे कारोबार कैसे करेंगे।

कारोबारियों ने बताया कि वर्तमान में वे हॉल मार्किंग के साथ कारोबार कर रहे हैं। अब केंद्र सरकार उनके ऊपर हॉल मार्किंग यूनिक आईडी व मानक ब्यूरों को समस्त जानकारी देने का दबाव बना रही है। इससे ग्राहकों को संतुष्ट कर पाना संभव नहीं होगा। वर्तमान में अधिकांश ग्राहक पैसे बचाने के लिए पक्के बिल के बिना ही आभूषणों की खरीदारी करते हैं। बड़े शहरों की तुलना में यहां के ग्राहक इन सब झंझट में नहीं पड़ना चाहते हैं। ऐसे में इस नियम के बाद सराफा का पूरा कारोबार प्रभावित होगा।

मार्किंग के चक्कर में लेट से मिल रहे जेवर
सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम गर्ग ने बताया कि होलमार्किंग सेंटर से बीआईएस के पास रिवेस्ट भेजा जाता है, फिर नंबर जनरेट होता है। इसके बाद ही ज्वेलरी व्यापारियों को मिल पाती है। इसी में समय लगता है। इससे व्यापारियों को परेशानी हो रही है । सराफा एसोसिएशन ने एलान किया कि यदि सिस्टम को सरल नहीं किया जाता है तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। सोमवार को 100 से ज्यादा दुकानें बंद रखी गई ।

मानक ब्यूरो को देनी होगी ऑनलाइन जानकारी

नियम के मुताबिक, पूरा स्टॉक मानक ब्यूरो की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। एक प्रोडक्ट की डिटेलिंग होगी, सभी का नंबर जारी होगा। सराफा कारोबारियों का कहना है कि ग्रामीण सराफा व्यापारी पोर्टल या सॉफ्टवेयर कैसे ऑपरेट करेगा, जबकि पहले से ही आभूषणों में हॉलमार्किंग हो रही है। गहनों का रिकॉर्ड भी सरकार के पास है और क्वालिटी पर नियंत्रण भी। अगर यूनिक आईडी का नियम जरूरी है तो इसे मैन्युफैक्चरर्स पर लागू करे। रिटेलरों को परेशान करना सही नहीं है।

जानिए क्या है एचयूआईडी

सराफा कारोबारियों ने बताया कि यह एक तरह की आईडी है, जिसे सभी कारोबारियों को लेना होगा। प्रत्येक सराफा कारोबारी के पास अपना एचयूआईडी होगा। यह आईडी उन्हें प्रत्येक नए पुराने आभूषणों पर अंकित करना होगा। ताकि इसकी बेचने वाले सराफा कारोबारी की पहचान आसानी से की जा सके। इसके बाद सराफा कारोबार दो नंबर का सोना और टैक्स चोरी नहीं कर सकेंगे।

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