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छत्तीसगढ़ में तीन साल के भीतर 570 किसानों ने की आत्महत्या: जितेंद्र वर्मा

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की जनता को अनाज उपलब्ध कराने वाले अन्नदाता रूपी किसानों की हालत खराब है। भूपेश बघेल की सरकार किसानों की उपेक्षा कर रही है। अब तक तीन सालों के अंदर सरकारी आंकड़े के अनुसार कुल 570 किसान आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कानों में जूं नही रेंगी। उपरोक्त बातें प्रेस को जारी बयान में छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल के स्थायी सचिव जितेंद्र वर्मा ने कही। श्री वर्मा ने कहा कि विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि यह सही है कि बीते तीन साल के अंदर 570 किसानों ने आत्महत्या की है।साहू ने बताया कि इन किसानों में से 187 और 79 अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के तथा 304 पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के हैं। साहू ने यह भी कहा कि सिर्फ दो ही किसानों ने किसानी के कारण आत्महत्या की है। आगे श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल किसानों के प्रति कितने संजीदा है यह स्पस्ट रूप से झलक रहा है। उत्तर प्रदेश के के लखीमपुर खीरी के सड़क दुर्घटना के दौरान मौत पर भूपेश बघेल ने अपने आलाकमान को खुश करने के लिए मृतको को 50 – 50 लाख रुपए मुवावजा राशि दी थी लेकिन छत्तीसगढ़ के किसानों को पांच रुपए नही दिया। लखीमपुर खीरी के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने चुनाव जीता है जबकि कांग्रेस के उम्मीदवारों को लगभग तीन तीन हजार मत मिले हैं। भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रही है।सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के किसानों को रिझाने के लिए 50 लाख रुपए मुवावजा इसलिए दिया गया क्योंकि उनकों उत्तर प्रदेश की सियासत चाहिए थी लेकिन यहाँ की जनता ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया और पार्टी 2 सीटों पर आकर थम गई। सरकार के कुव्यवस्था के चलते आए दिन किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन सरकार बेखबर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह विधानसभा क्षेत्र के बठेना गांव में 5 अनुसूचित जाति के किसानों ने आत्महत्या की लेकिन मुख्यमंत्री ने इसकी सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझा। नए रायपुर में जमीन अधिग्रहण में मुवावजे और अन्य 15 सूत्रीय मांगों को लेकर लगभग 80 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं जिसमे एक किसान की मौत भी हो गई लेकिन सरकार ने सिर्फ 4 लाख रुपए मुवावजा देकर अपने दायित्वों से इतिश्री कर ली। सरकार की इस दोहरेपन के रवैय्ये से किसान आक्रोशित और बहुत दुःखी है।

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