कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

आदमखोर के हमले से 17 दिन में दूसरी मौत:घर की बाड़ी से महिला को घसीटकर ले गया तेंदुआ, मिली आधी-अधूरी लाश

  • जिले में तेंदुओं, भालुओं और हाथियों का आतंक, लोगों को नहीं मिल पाती मदद

चारामा क्षेत्र के महानदी के तटवर्ती गांवों में आदमखोर तेंदुए की दहशत बढ़ती जा रही है। दिनदहाड़े इलाके में घुमने वाला आदमखोर तेंदुआ अब तक कई मवेशियों व ग्रामीणों पर हमला कर चुका है। 17 दिन के अंदर उसने दूसरी बार भैंसाकट्टा गांव में घर में घुस कर महिला पर हमला किया और उसे नोच-नोच कर खा गया। महिला की आधी-अधूरी लाश खेतों में मिली। इस घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीण काफी डरे हुए हैं।

चारामा के गांव भैंसाकट्टा में बीती रात महिला उर्मिला बघेल 35 वर्ष बाथरूम जाने उठी। इसी दौरान बाड़ी में तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे घसीटते झाड़ियों में ले गया। यहां उसे नोच-नोच कर खा गया। परजन बताते हैं कि सुबह जब वे उठे तो महिला घर में नहीं दिखी। आंगन में खून के धब्बे दिखे। निकट ही खेत में महिला की क्षत विक्षत लाश मिली। महिला के के शरीर के ऊपरी हिस्से को तेंदुआ खा चुका था। 20 अगस्त भी पलेवा भी ऐसी घटना हुई थी।

चारामा के इन गांवों में है भालुओं और तेंदुओं की दहशत
तेंदुए की दहशत चारामा के महानदी तट के गांव पलेवा, कोटेला, बांडाटोला, हटकाचारामा, रानीडोंगरी, अरौद, भैंसाकट्‌टा, गितपहर, हल्बा, जेपरा में है। अरौद की जोगीगुंडरा पहाड़ी, पलेवा के नयापारा मार्ग स्थित पहाड़ी व अन्य पहाड़ियों में तेंदुओं का ठिकाना है। यहां भालू भी निवास करते हैं। जिले में ऐसे कई गांव है जहां हाथियों से बचने के लिए लोगों को रतजगा करना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा के लिए रात में स्कूल या सामुदायिक भवन में सुलाना पड़ता है।

बिजली बंद रहने से घर में दुबके रहते हैं लोग
चारामा इलाके में अंधेरा होते ही जंगली जानवरों का खतरा मंडराने लगता है। इसके बाद भी इलाके में बिजली आपूर्ति व्यवस्था ठीक नहीं है। आए दिन बिजली बंद रहने से जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण अंधेरा होते ही घर में दुबके रहते हैं। घटना की रात भी इलाके में बिजली बंद थी। इसको लेकर ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ आक्रोश है।

तेंदुए को पकड़ने लिखा उच्च अधिकारियों को पत्र
चारामा वन परिक्षेत्र अधिकारी सियाराम सिंग ने कहा कि इलाके 5 तेंदुए हैं। दोनों घटनाओं में एक ही तेंदुआ शामिल होगा यह कहा नहीं जा सकता। तेंदुए की फितरत है जहां वह शिकार करता है वहां दोबारा आता है। इसलिए इस इलाके में उक्त तेंदुए पर नजर रखी जा रही ताकि उसे पकड़ा जा सके। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।

शहर में दिन दहाड़े हाईवे पर घूमता रहा भालू
कांकेर शहर में दिनदहाड़े भालू हाईवे पर घुमते देखा गया। सिंगारभाट इलाके में भालू पिछले कुछ दिनों से सड़कों पर घूम रहा है। वहां के लोगों में दहशत है। सप्ताह भर पूर्व उदय नगर में भालू व तेंदुए को घूमते देखा गया था।

इन घटनाओं से समझिए आदमखोर की दहशत
12 दिसंबर 2017- कांकेर से 8 किमी दूर खमडोढ़गी में 65 वर्षीय वृद्ध महिला शन्नो हिचामी का तेंदुए ने शिकार किया। महिला का एक पैर, रीढ़ की हड्डी व दोनों हाथ ही मिल सके।
22 दिसंबर 2017 – कोरर के बांसकुंड जंगल में महिला दुकली टेकाम 63 वर्ष निवासी तेलम्मा का शिकार। शव के दोनों हाथ व पैर ही मिले।
20 अगस्त 2021- चारामा के पलेवा में घर में सो रहे गाड़ाराम जुर्री 70 वर्ष को तेंदुआ उठा ले गया। शोर मचाने पर तेंदुआ भाग गया लेकिन तब वह बुजुर्ग को मार चुका था।
7 सितंबर 2021- भैंसाकट्‌टा में महिला उर्मिला बघेल 35 वर्ष का किया शिकार। घर के बाहर झाड़ियों में क्षतविक्षत लाश मिली।

विभाग ने पहले कहा था- घटना दोबारा नहीं होने दी जाएगी, अब कह रहा- घटना दूसरी तरफ हुई
इससे पहले पलेवा में तेंदुआ द्वारा बुजुर्ग की हत्या किए जाने के बाद वन विभाग ने कहा था अमला पूरी तरह मुस्तैद है, दूसरी घटना होने नहीं दी जाएगी। अब दूसरी घटना के बाद वनविभाग का कहना है कि तेंदुए ने दूसरी तरफ हमला किया है। इस घटना के बाद वन विभाग ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिख तेंदुआ को पकड़ने की बात कही गई है क्योंकि वह आदमखोर हो गया है। वनविभाग यह मानने को तैयार नहीं है कि यह हमला पलेवा में बुजुर्ग पर हमला करने वाले तेंदुए ने किया है। वनविभाग का अगर यह दावा सही है तो चारामा इलाके में दो आदमखोर तेंदुए घुम रहे हैं। हल्बा से अरौद तक पांच तेंदुए होने की बात कही गई है। कितने आदमखोर हुए हैं यह स्पष्ट नहीं है।

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