
[ad_1]
हाल में यह समाचार पढ़ने को मिला कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो आज भी अप्रवासी नरेश के नाम से रजिस्टर हो जाते हैं, झुलसाने वाली गर्मी के मौसम में लू के प्रकोप से बचने के लिए प्याज की लिंक साथ चल रही है। जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि और जन सेवक का जीवन कभी भी खिलता नहीं है। क्या अमीर और क्या गरीब, हर मौसम में दौड़-धूप करती है। प्याज का वह तासीर, जो गरीब परवर है, राजवंशी नेता का भी निरापद जुनून है। लेकिन यहां हम बात गुण या तासीर की नहीं, बल्कि जायके की कर रहे हैं। पर: उसी तरफ मुड़ने की जरूरत है।
प्याज का पहला ज्योका टीखा होता है, जो छिलते और अवरुद्ध खिंचाव ही आंखों से आंसू की धारा का बांध होता है। यह तीखा जायका ही चटनी या थेचे में प्याज को आकर्षित करता है। अकेले कुचले हुए प्याज के साथ बेसी रोटी भी स्वादिष्ट बनती है। यदि संभव हो, तो लाल मिर्च, लहसुन, जुन टमाटर प्याज के जायके के अनुरूप कर सकते हैं। जो लोग इतना तिखा जायका नहीं सह सकते, वे प्याज की कतरों को पानी में कुजकर इस स्वाद को कच्चा बना लेते हैं। सलाद और रायते में ऐसे ही प्याज का प्रयोग होता है।
प्याज की संख्या कई और प्राप्त होती हैं। एक प्याज गुलाबी चमकीला होता है, तो दूसरी त्वचा बिल्कुल सफेद होती है। इन दोनों के जायके में तीखेपन में तो अंतर ही होता है, इनकी कुदरती मिठास में भी मतभेद होता है। प्याज के संदर्भ में सांख्य जायके की बात कुछ लोगों को अटपटी लग सकती है, लेकिन यदि कभी किसी सामिष या निरामिष व्यंजन में प्याज की मात्रा ज्यादा हो जाए, तो वह जुबान पर सबसे पहली मिठास ही प्रविष्टि पहुंच है। दिल्ली और भोपाल का इस्तु इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। प्याज़ की इस मिठास को काटने के लिए ही इसकी पाक विधि में मामूली का दही या टमाटर डालना पड़ जाता है। सलाद के लिए इसे हरे प्याज का इस्तेमाल किया जाता है, इसमें मिठास बहुत कम होती है। उस प्याज का स्वाद उसी की हरे वर्क के साथ तैयार करने पर जरूर मीठा दिखना चाहिए।
प्याज का जायका सिर्फ तीरा (वाष्पशील आयोडिन के कारण) सिर्फ तीरा ही नहीं होता, काफी प्रभावशाली भी होता है। कतरी प्याज के छोटे-दादा कण ही भेलपूरी जैसे चातुर्य के दांव में जान देते हैं या प्याज के लच्छे तंदूरी टिक्कों और कबाबों के जायकों को आंकते हैं। प्याज़ के बिना यह बिल्कुल विपरीत तरीके से होते हैं। पोहा जैसी रोशनी-फुल्की अल्पाहार वाली चीज में भी प्याज का जरा सा पुट इस व्यंजन को उसी का बना देता है- कांदा पोहे। गोवा में सिरके और प्याज को प्रमुखता देने वाले विंडालू को दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल हुई है। पुर्तगाली भाषा में सिरके और प्याज के लिए जिन शब्दों का प्रयोग होता है, उनके अक्षर के पहले संदेश से ही यह कथन हुआ है।
विदेशों में भी प्याज के विभिन्न जायकों का उपयोग अलग-अलग खातों में किया जाता है- रिटर्न टेट से लेकर न्यूट्रिशन केस, जैम तक। अभी भी फटे या खराब में प्याज का इस्तेमाल बहुरूपिये की तरह होता है। भुने प्याज की तो दुनिया ही न्यायी है। बिरयानी हो या पुलाव के अभाव में उनकी कल्पना नहीं की जा सकती। गुजरे जमाने में बहुत से लोग प्याज को तामसिक समझ से परहेज करते थे, पर अब यह प्रतिबंध लगभग लुप्त हो चुका है।
[ad_2]Source link



