फिर बढ़ी मियाद:भवन का डिजाइन गलत बना था इसलिए सालों बाद भी नहीं हुई अस्पताल के लिए जरूरी

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की शिफ्टिंग दिसंबर तक होगी । पहले 15 जुलाई तक तक जिला चिकित्सालय से अस्पताल कॉलेज परिसर में शिफ्ट कराने की बात कही गई थी। कॉलेज भवन में गैस पाइपलाइन, फायर फाइटिंग और सेंट्रल एसी लगाने का काम एक साथ शुरू कर दिया गया। 18 दिसंबर को बाबा गुरुघासीदास जयंती मेकाहारा को कॉलेज परिसर में शुरू करने की तैयारी की गई है।
मेडिकल कॉलेज भवन में कोरोना मरीजों को भर्ती किया गया था। पीडब्ल्यूडी ने कहा था कि जब तक पूरी बिल्डिंग नहीं दी जाएगी तब तक काम की रफ्तार में तेजी नहीं आएगी । यहां सबसे ऊपर की मंजिल में कोरोना मरीज रखे गए हैं। यहां 8 मरीज भर्ती हैं, फर्स्ट सेकंड फ्लोर में अभी एसी, पाइपलाइन और फायर फाइटिंग का काम चल रहा है।
संक्रमण के डर से कर्मचारी काम करने से इनकार कर रहे है। स्किन, डेंटल, फिजियोथेरेपी, ईएनटी (नाक, कान, गला) नेत्र रोग विभाग कॉलेज परिसर में शिफ्ट करने की तैयारी थी, लेकिन शिफ्टिंग होती तो काम में और देर होती इसलिए अभी सारे विभाग जिला चिकित्सालय में ही चलते रहेंगे।
शुरुआत से ही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल केजीएच बिल्डिंग में चल रहा है । यहां 17 डिपार्टमेंट हैं, 6 साल से भवन तैयार हो रहा है लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। पूर्व में जो ड्राइंग डिजाइन बनाई गई थी उसमें सेंट्रल एसी की डक्टिंग नहीं थी। इस खामी की वजह से करोड़ों रुपए फिर खर्च करने पड़े और अस्पताल की शिफ्टिंग लंबे समय से अटकी हुई है।
फॉल्स सिलिंग को तोड़कर डक्टिंग बनाई गई है। पीडब्ल्यूडी के ईई आरके खामरा ने बताया कि अभी बिल्डिंग में डक्ट लगाने का काम के साथ गैस पाइपलाइन का काम तेजी चल रहा है। कुछ जगहों में फायर फाइटिंग शुरू कराया है। इलेक्ट्रिकल के साथ सिविल डिपार्टमेंट एक साथ काम कर रहे हैं ।
तारीख पे तारीख
- 2012 में पहली डेडलाइन, फिर 2016 और 2017 में अलग-अलग डेडलाइन तय की गई, अब दिसंबर में शिफ्टिंग का दावा
- शुरुआती लागत 106.35 करोड़, लागत बढ़ने बजट 282.50 करोड़ रुपए हो गया



