63 लाख रुपए ठग लूटकर ले गए:कोरोना से बेटे-बेटी को खो चुके बुजुर्ग की कहानी; वो रोज फोन करता था, मैंने एक दिन पूछा- ठग तो नहीं हो, उसने कहा- बैंक आकर देख लो

कोरोना ने बेटा छीना और पूरी दौलत ठग लूटकर ले गए। जिंदगी भर पाई-पाई जोड़कर 63 लाख रुपए जमा किए थे। सोचा बैंक में सुरक्षित रहेंगे। ठगों के हाथ वहां तक पहुंच गए। बिजली विभाग के रिटायर अधिकारी अशोक साहू को पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनके 63 लाख आखिर कहां गए? न तो पुलिस कुछ बता पा रही है और न ही बैंक वाले लेन-देन का रिकार्ड दे रहे हैं। आठ साल पहले बेटी और अब बेटे की मौत के साथ पैसे लुटने के गम ने उन्हें हताश कर दिया है।
चार माह पहले ही बिजली विभाग से हुए थे रिटायर
अभनपुर निवासी अशोक साहू ने बताया कि मैंने बिजली विभाग में लंबे समय तक नौकरी किया है। 4 माह पहले मार्च में ही मैं रिटायर हुआ। रिटायरमेंट के बाद मुझे जो पैसे मिले थे, उसे बैंक में जमा कर दिया। गांव में थोड़ी खेती बाड़ी है, उसका भी पैसा उसी खाते में जमा होते हैं। मेरी एक बेटी और बेटा था। बेटी की 2013 में मौत हो गई। 35 साल का बेटा किशोर था, जिसके 2 बच्चे हैं। अप्रैल में किशोर की कोरोना से मौत हो गई। परिवार सदमे में था। किशोर के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनके भविष्य को लेकर चिंता थी। 17 जून को स्टेट बैंक रायपुर के नाम से फोन आया।
जिस नंबर से फोन आया था उसमें स्टेट बैंक का लोगो लगा था। फोन करने वाले ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया। उसने नाम लेकर बात की। उसने कहा कि किशोर से बात कराइए। तब मैंने बताया कि किशोर की कोरोना से मौत हो गई। उसके बाद फोन करने वाले ठग ने कहा कि उसका लेन-देन क्लियर करना होगा। खाता बंद करना होगा। किशोर के खाते में जो पैसा है, वह मुझे मिल जाएगा। उसने कहा कि खाता को अपडेट करने पर ओटीपी आएगा। उसे बताना होगा। मैं ठग के झांसे में आ गया। 17 जून से लेकर 7 जुलाई तक ठग का फोन आया।
मैं उसके इरादे से बेखबर था, 20 दिन में 40 बार बता दिया ओटीपी
वो मुझे 20 दिनों तक लगातार फोन करता था। हर बार पूछता था कि आपके मोबाइल में क्या ओटीपी नंबर आया है। मैं उसके इरादों से बेखबर था। 20 दिन में 40 दफा उसे ओटीपी नंबर बताया। पता नहीं एक दिन मेरे मन में कुछ खटका हुआ। ठग ने ओटीपी पूछने के लिए फोन किया तो मैंने कहा कि वह मेरे साथ ठगी तो नहीं कर रहा है? तब ठग ने हंसकर कहा कि नहीं सर।
वह जयस्तंभ चौक के स्टेट बैंक मुख्यालय में बैठता है। कभी भी आकर मिल सकते हैं। इतनी बात सुनने के बाद मुझे उस पर भरोसा हो गया। इसी दौरान मैं खुद भी कोरोना पॉजीटिव हो गया। उसके बाद भी वह मेरे बारे में जानकारी लेता रहा। उसके बाद अचानक उसका फोन आना बंद हो गया। कोरोना से स्वस्थ्य होने के बाद मैंने ठग के दूसरे नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसने बंद कर दिया।
उसके बाद मैंने कई बार एटीएम में जाकर बैलेंस चेक किया। हर बार जीरो बैलेंस की जानकारी मिली। तब 31 जुलाई को फिर बैंक गया और वहां ठग के बारे में पता किया। वहां कोई नहीं था। तब 1 अगस्त में अभनपुर थाना और सायबर सेल सिविल लाइन में शिकायत की। खाते की जानकारी लेकर पुलिस वालों ने मेल किया और कहा कि पैसा वापसी की कोशिश करते हैं। लेकिन अब तक पैसा नहीं मिल पाया, न ही बैंक की ओर से कोई जवाब मिला है।
बैंक ने नहीं दी किसी भी ट्रांजेक्शन की जानकारी
अशोक ने बताया कि उन्होंने बैंक से ट्रांजेक्शन की जानकारी मांगी है कि किस-किस खाते में पैसों का ट्रांजेक्शन हुआ है। अब तक उन्हें जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस वालों ने मेल किया था, लेकिन एक भी पैसा वापस नहीं मिला है। मैंने नौकरी के दौरान पाई-पाई जोड़ा था। उसे ठग ले गए। पुलिस ठग को पकड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कोई पैसा वापसी की गारंटी या दावा नहीं कर रहे है। मेरी जमा पूंजी गई है। मुझे तो मेरा पैसा वापस चाहिए। अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।



