दिल्ली हाईकोर्ट ने 40 साल चली कानूनी लड़ाई में बुजुर्ग को दी राहत, कहा-‘बहुत हुई तारीख पर तारीख अब बस…

1984 में एसटीसी के मुख्य विपणन प्रबंधक सुरेंद्र कुमार को एक फर्म से 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई. 2002 में सत्र अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा और 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. सुरेंद्र कुमार ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी. आरोप था कि उन्होंने 140 टन सूखी मछली के ऑर्डर के बदले रिश्वत मांगी थी, जिसके बारे में शिकायतकर्ता हामिद ने सीबीआई को सूचना दी थी. छापेमारी के दौरान सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया. उच्च न्यायालय ने यह भी पाया कि दोषी ने 2002 में अदालत द्वारा निर्धारित 15 हजार रुपये का जुर्माना चुका दिया है.
चार दशक तक चली सुनवाई
बेंच ने कहा कि 1984 की यह घटना चार दशकों तक चली. निचली अदालत का निर्णय आने में 19 वर्ष लगे और अपील 22 वर्षों तक लंबित रही. यह देरी संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है. आरोपी भारतीय राज्य व्यापार निगम (एसटीसी) का पूर्व अधिकारी है, जिसे अब एक दिन के लिए जेल में रखा जाएगा.



