राज्य महिला आयोग ने दी जांच टीम की शिकायत, कहा- मामला बेहद गंभीर | अंबिकापुर सेंट्रल जेल में महिला कैदियों के नग्न वीडियो बनाने की शिकायत पर राज्य महिला आयोग ने 2 सदस्यीय जांच टीम गठित की

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अंबिकापुर36 मिनट पहले
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अंबिकापुर सेंट्रल जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप। (फ़ॉलो फोटो)
अंबिकापुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध महिला बंदियों के कपड़े उतारने और उनके साथ अश्लील हरकत करने की शिकायत के मामले में राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख दिखाया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है।
इस मामले को चयन से लिया गया छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष ने जांच के लिए 2 कार्मिक टीमों का गठन किया है। उन्होंने 7 दिनों की आंतरिक जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। डॉ. किरणमयी नायक ने 2 रथ टीम की स्थापना पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। टीम में राज्य महिला आयोग की सदस्य नीता विराट और आचार्याचार्य शामिल हैं।

अंबिकापुर सेंट्रल जेल प्रबंधन पर लगा गंभीर आरोप।
इसके साथ ही पुलिस कप्तान सरगुजा को 7 दिन की आंतरिक जांच रिपोर्ट आयोग से पूछताछ करने के लिए कहा गया है। आयोग के अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है। यदि ऐसी घटना वास्तव में हुई है, तो इस पर आयोग सख्त कार्रवाई करेगा।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक।
ये है पूरा मामला
अंबिकापुर सेंट्रल जेल में महिला बंदियों के कपड़े उतारकर वीडियो बनाए जाने का आरोप एक युवक ने लगाया है और उसकी याचिका राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से है। उन्होंने कहा कि मौसी ने जेल में जाकर यह हरकत की बात उन्हें और उनके परिवार को बताई है।

मानवाधिकार आयोग से युवाओं ने लगाई याचिका।
जानकारी के अनुसार, सेंट्रल जेल में बंद महिला बंदियों से वंचित व्यवहारवादी की शिकायत कमलेश कुमार साहू ने की है। कमलेश ग्राम मुचेसा का रहने वाला है। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, गृह विभाग के सचिव, जेल विभाग के महानिदेशक, सरगुजा डेमोक्रेट और जेल के डिप्टी के खिलाफ याचिका दायर करते हुए उन्होंने जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हर महीने पैसे देने होते हैं
युवक ने कहा कि उसकी मौसी पिछले 6 महीने से एक मामले में सेंट्रल जेल में बंद है। वो और उनका परिवार मौसी से समय-समय पर सेंट्रल जेल में मुलाकात करते रहते हैं। उसकी मौसी ने बताया कि जेलर ममता पटेल और महिला जेलर प्रहरी मेरी मार्गरेट को हर महीने पैसे देने वाली फिल्में हैं। यदि किसी महिला बंदी द्वारा रुपये देने से मना किया जाता है, तो अधिकारी और जेल प्रहरी उसके साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं।
वे महिला नंबर से महिला बंदियों के कपड़े उतरवाकर शारीरिक और मानसिक रूप से अस्थिर होती हैं। उनके साथ अश्लील और अश्लील हरकतें की जाती हैं। यही नहीं महिला अधिकारी अपने मोबाइल पर वीडियो बनाती है। उसे अन्य लोगों के वीडियो शेयर कर डिलिवरी के खतरनाक शेयर मिलते हैं। युवक ने कहा कि उसकी मौसी से भी रुपये मांगे गए हैं। मौसी ने परिवार को बताया कि उसे मोटा न किया जाए, इसलिए पैसे दे दिए, नहीं तो वो शांति से नहीं रहेगा और उसे ठीक से खाना भी नहीं मिलेगा।
जांच की मांग
युवक ने कहा कि उसकी मौसी से जो गुनाह हुआ है, उसकी सजा तो उसे मिलेगी, लेकिन जेल में बंद महिला बंदियों ने ऐसी याचिका दायर कर मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। वह मामले की जांच की मांग कर रहा है।
मेरे पास नहीं है याचिका
यहां सेंट्रल जेल के अध्यक्ष योगेश सिंह ने कहा था कि मेरे पास ऐसी कोई याचिका नहीं है, अगर किसी ने याचिका दायर की है, तो मेरे पास आवेदन करें। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि जेल में सभी मोबाइल फोन प्रतिबंधित हैं।
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