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राँची. झारखंड में करीब पांच प्रतिशत आबादी सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित है। जनजातीय जनसंख्या सबसे अधिक पीड़ित है। जनजातीय जनसंख्या के लगभग 12 प्रतिशत लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। हिमेट डॉक्टर अभिषेक रंजन ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के बीच जागरूकता की जरूरत है, क्योंकि पीड़ित लड़के-लड़की की अगर शादी होती है, तो जन्म लेने वाले बच्चों में इस बीमारी का मुख्य लक्षण होता है। ऐसे में शादी से पूर्व जनजातीय जनसंख्या के पर्यटन के लिए कैंप ले जाना चाहिए। इधर, एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में झारखंड के छह से 59 महीने के 67.5 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हो गये हैं. इसके अलावा 15 से 49 साल की 65.3 फीसदी महिलाएं एनिमिया से पीड़ित हैं। वहीं, 56.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में एनीमिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है।
अभियान का शुभारंभ कांके सेक्टर स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर में हुआ
सिकल सेल एसोसिएटेड अभियान का शुभारंभ भारत के 17 राज्यों में किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार दोपहर 3.30 बजे मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से ऑफलाइन लॉन्च किया। वहीं झारखंड में इस अभियान का शुभारंभ कोकदोरो पंचायत स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर में किया गया।
सिकल सेल डिजाइन से निबटने के लिए स्वास्थ्य देखभाल अभियान : मंत्री
रांची के कांके खंड के कोकदोरो पंचायत स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने प्रधानमंत्री के हाथों इस बढ़ते अभियान के विजन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक स्वास्थ्य अभ्यारण्य में इस रोग से निबटने के लिए अभियान चलाया जायेगा। मॉस्क पर सिकल सेल प्लांट से प्रभावित 25 प्रतिशत लोगों के बीच सिकल सेल कार्ड का वितरण किया गया। वहीं 15 लाभार्थियों के बीच आयुष्मान कार्ड का वितरण किया गया। इस मौके पर स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार सिंह, सांसद संजय सेठ, विधायक सामरी लाल, एमडी एनएचएम आलोक एलसीडी, जिप सदस्य प्रमुख सदस्य परवीन, शीलवंत कुमार भट्ट, सीएस डॉ. विनोद कुमार आदि मौजूद थे।
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