विशेषज्ञों का अनुमान: तीन करोड़ तक हो सकती है छत्तीसगढ़ की जनसंख्या, पिछले ट्रेंड को देखकर अनुमान

कोरोना ने इस साल की जनगणना पर भले ही ब्रेक लगा दिया हो, लेकिन प्रदेश में लोगों की गिनती करने के लिए 70 हजार अधिकारी-कर्मचारी पूरी तरह तैयार है। वैसे विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल होने वाली गिनती में छत्तीसगढ़ की जनसंख्या लगभग तीन करोड़ हो सकती है। यह अनुमान जनसंख्या के पिछले ट्रेंड को देखकर लगाया गया है। राज्य बनने के बाद यहां रोजगार व कारोबार की अपार संभावनाओं को देखते हुए बाहरी लोगों का आना भी तेजी से बढ़ा है। आशंका जताई जा रही है कि अगर गिनती में विलंब हुई तो असर प्रदेश व देश की नीतियों व प्लानिंग पर पड़ेगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। 2001 में प्रदेश में 2 करोड़ 8 लाख 33 हजार 803 लोग रहते थे। इनमें 1 करोड़ चार लाख पुरुष (50.22 प्रतिशत) थे जबकि महिलाएं 1 करोड़ तीन लाख यानी 49.7 फीसदी थीं। देश की कुल आबादी का 2.02 प्रतिशत छत्तीसगढ़ में थी। 2011 में यह बढ़कर 2 करोड़ 55 लाख 40 हजार 196 तक पहुंच गई। इनमें 1 करोड़ 28 लाख पुरुष (50.3 फीसदी) थे जबकि महिलाएं 1 करोड़ 27 लाख (49.78 प्रतिशत) थीं। छत्तीसगढ़ की आबादी देश की जनसंख्या का 2.11 प्रतिशत था। इस बार ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों ही मोड में डेटा जमा किया जाएगा। इससे जानकारी तत्काल मिलने लगेगी। अब सिर्फ केंद्र सरकार के रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया के नोटिफिकेशन का इंतजार है। अगर इस काम में ज्यादा वक्त लगा तो विकास, फ्यूचर प्लानिंग, देश के आर्थिक हालातों की वास्तविक जानकारी पता करने में दिक्कत होगी।
देर का असर, प्रदेश व देश पर
हर जनगणना में फॉरमेट बदलता है। इसका सोशल कंपोनेंट काफी अहमियत रखता है। इसकी वजह इससे देश की पॉलिसी ओरिएंटेशन का पता चलता है। ईस्ट इंडिया के कंपनी के राज के दौरान भी जनगणना होती थी, लेकिन इसे जनगणना के नाम से नहीं किया जाता था। हालांकि रायपुर व बिलासपुर के 1929 के गजेटियर के डाक्यूमेंटेशन में भी इसकी झलक मिलती है। सरकार द्वारा जनता खासकर गरीबों को दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ कितना मिल रहा है, कितने लोग पीडीएस से लाभांवित हो रहे हैं, कितने गरीबी रेखा से ऊपर उठे या एपीएल-बीपीएल में पहुंच गए, इसकी जानकारी मिलती है। माइग्रेट मजदूरों के आंकड़ों से लेकर नेशनल सैंपल सर्वे, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का वास्तविकता पता चलती है। रोजगार को लेकर सरकार के सामने आइना आ जाता है।
सीधी बात सुरक्षित जनगणना करेंगे रजत कुमार, जनगणना निदेशक सवाल – राज्य में तैयारी प्रारंभ हो गई है? – हां, मास्टर्स ट्रेनर्स तैयार हो चुके हैं। फील्ड अफसर तैयार हैं। डेटा इंट्री से संबंधित काम हो रहा है। नए ब्लॉक को भी शामिल किया गया है। ताकि नए नक्शे बन सकें। जनगणना से संबंधित सभी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि केंद्र सरकार से आदेश मिलते ही काम प्रारंभ हो सके। सवाल – क्या जनगणना में देरी का असर दिखेगा? – हम सुरक्षित और पारदर्शी जनगणना करेंगे। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड से काम करेंगे। जनगणना महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास के लिए 2011 की जनगणना व ताजा संभावित डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑनलाइन वर्क होने से डेटा जल्द उपलब्ध हो सकेंगे।



