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पीएम मोदी ने अपने काफिले का साइज 50% छोटा किया, पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए खुद की अपील पर किया अमल

हालांकि, पीएम मोदी की सुरक्षा और एसपीजी के प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए वाहनों की संख्या में कमी की गई। हैदराबाद में पीएम मोदी ने ये अपील की थी। इसके तुरंत बाद बड़ोदरा और गुवाहाटी के उनके दौरे के दौरान उनके काफिले की गाड़ियों को सीमित किया गया था।

प्रधानमंत्री ने अपनी सुरक्षा के लिए तैनात विशेष सुरक्षा दल (SPG) को अपने काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने एसपीजी को यह भी कहा है कि जहां तक हो सके, बिना नई गाड़ियां खरीदे, उनके काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को शामिल किया जाए। पीएम मोदी के निर्देशों को एसपीजी ने पालन करना भी शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि हैदराबाद में अपने भाषण के तुरंत बाद पीएम मोदी के काफिले के साइज में कटौती की गई। इसको प्रशासनिक दक्षता, सार्वजनिक सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अक्सर VVIP मूवमेंट के दौरान, लंबा जाम लग जाता है और आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहीं, ईंधन के भी मितव्ययिता से खर्च करने की प्रधानमंत्री की अपील के बाद उन्होंने खुद अपना काफिला छोटा कर सकारात्मक संदेश दिया।

CM योगी और उनके मंत्रियों का काफीला भी छोटा

उधर, प्रधानमंत्री मोदी की देशव्यापी अपील पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता और अधिकारियों के लिए बड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले की गाड़ियों को 50 फीसदी किया जाए। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि सीएम ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करे।

पीएम मोदी की 7 अपील

बता दें कि पश्चिम एशिया संकट और तेल-गैस के दामों में बेतहासा बढ़ोतरी के कारण 10 को हैदराबाद दौरे के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से 7 अपील की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल के संयमित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तेल की बचत से देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। धानमंत्री मोदी ने देश की जनता से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। सोना महंगा होता है तो रुपया और टूटता है। साथ ही महंगा सोना खरीदने से विदेशी मुद्रा कम होगी। इससे देश मंदी की चपेट में आ सकता है। जबकिकोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए कार्यकुशल उपायों को दोबारा लागू करने का सुझाव दिया था।  उन्होंने कहा कि वर्क-फ्रॉम-होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल बैठकों जैसी व्यवस्थाएं न केवल समय और संसाधनों की बचत करती हैं, बल्कि ईंधन की खपत भी कम करती हैं।

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