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अब दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ करवाई की मांग
मुंगेली |जिला के लोरमी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भारतसागर बांध के पास मारपीट मामले में पीड़ित ने अब दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है, जिसको लेकर मारपीट करने वाले लोरमी के तत्कालीन थाना प्रभारी उप निरीक्षक सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ तीन दिवस के भीतर अगर अपराधिक प्रकरण दर्ज करने के साथ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई तो तीन दिन के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने अपनी पत्नी और 6 माह के बच्चे के साथ आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है|
वहीं इसको लेकर मारपीट के पीड़ित जुआरी ने मुंगेली पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत भी की है. इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि मुझे कुछ भी होता है, तो इसकी संपूर्ण जवाबदारी जिले के पुलिस विभाग के अधिकारी की होगी | वहीं पुलिसकर्मियों के मारपीट से त्रस्त पीड़ित व्यक्ति आमरण अनशन करने की चेतावनी देते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है. युवक का या आरोप है कि भारतसागर बांध के पास लोरमी का तत्कालीन थाना प्रभारी उप निरीक्षक ने अपने स्टाफ से मेरे दोनों हाथों को ऊपर उठवाकर गंदी गंदी गालियां देते हुए डंडे से बेरहमी से पीटा
पीड़ित व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों को ज्ञापन सौंपा
पीड़ित ने बताया कि थाने में लाकर मुझे मारा गया था, जिसकी लिखित शिकायत मेरे द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिनांक 6.10.2022 एवं दिनांक 7.10. 2022 को की, जिसके बाद घटना को आज 11 दिन बीतने को है, लेकिन ना ही मेरा डॉक्टरी मुलाहिजा कराया गया है, ना ही मारपीट के दोषी उप निरीक्षक एवं अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नही गई है. मैं न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हूं.
भारतसागर बांध के पास 8 जुआरियों को लोरमी थाना के पुलिस स्टाफ के द्वारा जुआ खेलते पकड़ा गया था, जिनके खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्यवाही की गई है. इस दौरान एक आरोपी लोरमी का रहने वाला है. उनके साथ तत्कालीन थाना प्रभारी समेत दो अन्य स्टाफ के द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई थी.
इस पूरे मामले की लिखित शिकायत बिलासपुर संभाग के आईजी समेत एसपी को करने के बाद बिलासपुर के आईजी के निर्देश पर मुंगेली जिले के पुलिस अधीक्षक के द्वारा उप निरीक्षक लोरमी थाने से सरगांव थाना तबादला कर दिया गया है.
मारपीट के पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक के इस कार्रवाई को भेदभाव पूर्ण कार्रवाई बताया है. उन्होंने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए. अगर 3 दिनों के भीतर अपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं करते हुए विभागीय कार्रवाई नहीं की गई तो अपनी पत्नी और छह माह के बच्चे के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने आमरण अनशन में बैठने की चेतावनी दी है. वहीं अनशन के दौरान किसी भी तरह कुछ होने की स्थिति में इसकी जवाबदारी जिले के पुलिस अधिकारी का होना बताया है.



