छत्तीसगढ़ विशेषदुर्ग जिला

कहते हैं न, जहां चाह, वंही राह ,घास काटने की मशीन बनाकर कमा रहे करोड़ों

दुर्ग। भिलाई के रहने वाले हर्ष जैन जिन्होंने अपनी स्टार्टअप कंपनी का टर्नओवर तीन साल में ही करोड़ रुपए के पार पहुंचा दिया है. यही नहीं उनके द्वारा विकसित बैटरी चलित घास कटाई मशीन भी लोगों को बहुत पसंद आ रही है, कहते हैं न, जहां चाह, वंही राह.

हर्ष जैन की सफलता की रोचक कहानी है. घर के लिए घास कटाई मशीन बनाई थी. तभी टाटा की एज्यूर कंपनी ने 10 घास कटाई मशीन के लिए निविदा जारी की. उन्होंने टेंडर भर दिया और घर में ही हाथों से मशीन बनाकर सप्लाई कर दी. दो लाख रुपए भी कमाए. फिर 30 मशीन का और आर्डर मिल गया.

क्षमता नहीं होने से बाहर के लोगों से काम करवाकर मशीनें आपूर्ति की तो पैसे नहीं बचे. ऐसे में पिता अनिल जैन को साथ लेकर इलेक्ट्रीशियन और वेल्डरों की टीम बनाई और खुद मशीनों का उत्पादन शुरू किया. तब से लेकर अब तक डेढ़ हजार मशीनें वे विभिन्न कंपनियों को बेच चुके हैं.

हर्ष के जुनून की सराहना करने अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने उनके स्टार्टअप को देश के चुनिंदा अव्वल 300 कृषि स्टार्टअप के लिए चयनित किया है.

12 लाख की नौकरी छोड़ी

हर्ष ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर से इलेक्ट्रिकल में स्नाातक की पढ़ाई की. टाटा कंपनी में 12 लाख रुपये सालाना की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी. अब तक नौ तरह की मशीन बनाकर उनका पेटेंट करवा चुके हैं. उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में पहुंच चुका है. अपनी कंपनी में उन्होंने 24 लोगों को रोजगार भी दिया है.

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