छत्तीसगढ़ विशेषदुर्ग जिला

निगम प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, मिनी स्टेडियम पर कब्जा कर रहे 117 घरों को तोड़ने कि कीगई कार्यवाही, अटल आवास में किया शिफ्ट

12 नवम्बर 2021| भिलाई तीन चरोदा नगर निगम ने गुरुवार सुबह बेजाकब्जा को लेकर बड़ी कार्रवाई की। निगम प्रशासन ने मिनी स्टेडियम पर कब्जा कर रहे 117 घरों को तोड़ने की कार्रवाई की। इस दौरान किसी प्रकार कोई लड़ाई झगड़ा न हो इसके लिए जिले से 18 थानों का लगभग 150 की संख्या में पुलिस बल बुलाया गया था। इतना ही निगम का भी अमला था। निगम प्रशासन ने घरों को तोड़ने के बाद वहां रह रहे गरीब लोगों को उमदा में आवंटित अटल आवास में शिफ्ट किया।

चरोदा नगर निगम के कमिश्नर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि भिलाई तीन खेल मैदान जिसे मिनी स्टेडियम के नाम से जाना जाता है में कई सालों से बेजा कब्जा हो रखा था। इसे खाली कराने के लिए निगम प्रशासन ने कई बार नोटिस जारी किया था। इससे पहले यहां रह रहे लोगों को उमदा में बने अटल आवास भी आवंटित किए जा चुके हैं। इसके बाद भी लोग यहां से बेजा कब्जा खाली नहीं कर रहे थे। इसे देखते हुए गुरुवार को पुलिस प्रशासन की मदद मांगी गई थी। बेजा कब्जा हटाने के लिए लगभग 150 पुलिस बल को बुलाया गया था। इसमें लगभग 60-70 महिला पुलिस बल भी थी। इसके बाद 150 की संख्या में निगम अमला सुबह 9 बजे मिनी स्टेडियम पहुंच गया और लोगों को घर खाली करने का समय देते हुए एक-एक कर घर तोड़ने की कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटाने के लिए कई जेसीबी औरडंपर लगाए गए थे।

निगम अमला जब बेजा कब्जा हटाने के लिए मिनी स्टेडियम पहुंचा तो वहां रह रहे लोगों और महिलाओं ने इसका विरोध करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस बल ने उन्हें कार्रवाई की चेतावनी देकर रोक दिया। इसके बाद उन्हें एक घंटे में घर खाली करने की चेतावनी देकर जेसीबी से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई।

एक तरफ जहां निगम अमला 117 मकानों को तड़ने की कार्रवाई कर रहा था तो वहीं दूसरी तरफ निगम की गाड़िया लोगों का सामान लादकर उन्हें उमदा ले जाने का काम कर रही थीं। उमदा में लोग अपन-अपना सामान बाहर रखकर बैठे अपने मकान की चाबी मिलने का इंतजार कर रहे थे।

उमदा में जहां पर 117 बेजा कब्जा धारकों को शिफ्ट किया गया वहां लोग एक दूसरे से अपना मकान नंबर पूछते नजर आए। लोगों का आरोप था कि निगम प्रशासन ने 117 मकानों को तोड़ा और उनका सामान यहां भेज दिया, लेकिन यहां सिर्फ 5 ब्लॉक में 60 मकान ही बने हैं। ऐसे में बाकी 57 घरों के लोगों को रहने की व्यवस्था कहां की जाएगी यह समझ से परे है।

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