कबीरधाम विशेष

नए-नए तरीके:पिकअप की 4 घंटे तलाशी के बाद गुप्त चेंबर खोज पाई पुलिस, 13.50 लाख रुपए का गांजा जब्त, दो गिरफ्तार

  • पिकअप के डाला को इस तरह से मोडिफाई किया गया था कि तस्करी के इस तरीके को देख पुलिस भी हैरान

मध्यप्रदेश-छग बॉर्डर पर चिल्फी पुलिस ने गुरुवार रात दो गांजा तस्करों को पकड़ा है। दोनों तस्कर पिकअप के पीछे डाला में 13.50 लाख रुपए का गांजा छिपाकर रखे थे। गांजा तस्करी के लिए तस्करों ने पिकअप के डाला को बारीकी से मोडिफाई कराया था। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि तलाशी के दौरान पुलिस को इस गुप्त चेंबर को ढूंढने और उसे खोलने में ही 4 घंटे का वक्त लग गया।

यह पहली बार है, जब तस्करी के लिए पिकअप में डाला को इस तरह से मोडिफाई किया गया था। तस्करी के तरीके से पुलिस हैरान है। चिल्फी टीआई रमाकांत तिवारी बताते हैं कि पकड़े गए आरोपी रोहित कुदेई पिता कुमार कुदेई (27) ग्राम गुरडापार जिला कंधामाल (ओडिशा) और दुर्भाषा प्रधान पिता उमाकांत प्रधान (28) ग्राम अंधारी जिला संबलपुर (ओडिशा) का रहने वाला है। आरोपियों ने बताया कि वे ओडिशा से महासमुंद के रास्ते छग में घुसे। इसके बाद बिलासपुर होते हुए पंडरिया, बोड़ला क्रॉस कर चिल्फी पहुंचे थे।

ओडिशा पासिंग नंबर प्लेट देखकर हुआ शक
सब्जियों की ढुलाई में लगे मध्यप्रदेश व छग पासिंग कई पिकअप वाहन चिल्फी से रोज आना-जाना करते हैं। जिस पिकअप में गांजा तस्करी की जा रही थी, वह खाली था। पिकअप का रजिस्ट्रेशन नंबर ओडिशा पासिंग दिखा रहा था, जिससे बॉर्डर पर तैनात पुलिस को शक हुआ।

तस्करी करने किराए पर लिया पिकअप, लोहे की चादर वेल्डिंग करा गुप्त चेंबर बनवाया, उसी में छिपाया गांजा
जिस पिकअप वाहन क्रमांक- ओडी 31जी 3289 में गांजा तस्करी की जा रही थी, वह आरोपियों की नहीं है। परिवहन मंत्रालय की वेबसाइट में चेक करने पर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम पर होना बता रहा है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इसे वे गांजा तस्करी करने 20 दिन के लिए किराए पर लिए थे। पिकअप के डाला के नीचे लोहे की चादर को वेल्डिंग कराकर इसमें गुप्त चेंबर बनवाया था, जिससे कि गांजा छिपा सके। इस गुप्त चेंबर में 132 पैकेटों में 135.150 किलो (1 क्विंटल 35 किलो) गांजा छिपाकर जबलपुर (मप्र) ले जा रहे थे। एमपी-सीजी बॉर्डर पर गांजे की तस्करी बढ़ती जा रही है। पुलिस कार्रवाई कर रही है।

तीन हाथों से निकलकर तस्करों तक पहुंचता है गांजा
अब तक पकड़े गए गांजा तस्करों से पूछताछ में कुछ अहम बात पुलिस को पता लगी है। अलग- अलग राज्यों के गांजा तस्करों के हाथों में गांजा पहुंचने से पहले 4 हाथों से निकलता है। पुलिस के मुताबिक गांजा की खेती ओड़िशा- आंध्रप्रदेश के बॉर्डर वाले इलाके में स्थानीय लोग करते हैं। इसके बाद गांवों से गांजा बिचौलियों को दिया जाता है। बिचौलिया इस गांजे को ओडिशा के झारसुगुड़ा, रायगुड़ा व मलकानगिरि समेत अन्य जगहों के बड़े गांजा सप्लायरों को देते हैं। ये बड़े सप्लायर अपने सब एजेंटों को गांजा देते हैं और इसके बाद यह तस्करों के हाथों तक पहुंचता है। अब तक पुलिस अंतिम की दो कड़ियों पर ही कार्रवाई की है। बताया जाता है कि इन तस्करों के आगे- पीछे गाड़ी में वॉचर भी रहते हैं, लेकिन वे भी पकड़े नहीं जाते।

पहले लग्जरी कार, अब मालवाहकों में कर रहे तस्करी
ओडिशा से छग, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक गांजे की सप्लाई होती है। पहले लग्जरी कारों में गांजे की तस्करी होती थी। डिमांड बढ़ने पर तस्करों ने इसे ट्रकों में सप्लाई करना शुरू कर दिया। कबीरधाम जिले के चिल्फी, महासमुंद समेत अन्य जिलों में लगातार कार्रवाई के चलते तस्करी का ट्रैंड बदल दिया है। अब मालवाहक पिकअप व बाइक पर गांजा तस्करी हो रही है।

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