बालोद में दिव्यांग युवती लाठी के सहारे 10 किमी पैदल जाती है सरकारी योजना में काम करने, पर खुद को लाभ नहीं


19 अगस्त 2021 | बालोद | छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण की तमाम योजनाएं चल रही हैं। कागजों और विज्ञापनों में लिखी इन योजनाओं का लाभ धरातल तक नहीं पहुंच पा रहा है। बालोद जिले की दिव्यांग युवती रोज 10 किमी पैदल एक लाठी के सहारे चलकर अपने काम पर जाती है। मदद के लिए उसने प्रशासन, शासन और मंत्री तक से गुहर लगाई, पर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। खास बात यह है कि युवती खुद भी सरकारी बिहान योजना में काम करती है। जहां उसे 360 रुपए महीना मिलता है।
डौंडी ब्लॉक के के वनांचल गांव पेटेचुवा की रहने वाली असवन्तिन नरेटी बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग है। माता-पिता की 10 साल पहले मौत हो चुकी है। उसके चार भाई हैं, लेकिन वे अपने परिवार में मस्त हैं। बावजूद इसके असवंतिन नरेटी ने जिन्दगी से हार नहीं मानी, और अपने दिव्यांग पैरों के लिए लाठी का सहारा ढूंढ कर उठ खड़ी हुई।

पैर कमजोर है तो क्या, लिया लाठी का सहारा
असवंतिन दिव्यांग होने के बावजूद भी जिन्दगी को चलाने के लिए बिहान योजना के तहत काम करना शुरु किया। वर्तमान में अभी जनपद पंचायत डौण्डी में काम कर रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उनके गांव से मुख्य मार्ग की दूरी करीब 5 किमी की है, और उनके पास आने-जाने के लिए कोई संसाधन नहीं है। ऐसे में रोज एक लाठी के सहारे पैदल लड़खड़ाते हुए हर रोज 10 किमी का सफर तय करती है।

समाज कल्याण मंत्री का है क्षेत्र
असवंतिन नरेटी के इस क्षेत्र से महिला एवं समाज कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया विधायक हैं। बावजूद इसके कोई सुध लेने वाला नहीं है। असवंतिन बताती है कि एक बार उनके गांव में मंत्री मैडम आई थीं, तो उसने बड़े ही विनम्रता से ट्राइ साइकिल की मांग की थी। मौके पर तो आश्वासन मिला गया, लेकिन बाद में किसी प्रकार से कोई मदद नहीं की गई।
इस मामले में बालोद जिला कलेक्टर जन्मजेय मोहबे ने कहा है कि जल्द ही संबंधित विभाग को भेज कर असवंतिन नरेटी को ट्राइ साइकिल व अन्य सुविधा की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल अब देखना यह होगा कि इस आश्वासन का असर कब तक होता है।



