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24 मार्च, 1882 को जर्मन फिजिशियन और माइक्रोबायोएस्ट रॉबर्ट कोच (डॉ. रॉबर्ट कोच) ने टीबी के बैक्टीरियम यानी जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस) की खोज की थी। यह आगे चलकर टीबी के निदान और उपचार में कई उपलब्धियां साबित हुईं। इस योगदान के लिए इस जर्मन माइक्रोबायोलॉजिकल को 1905 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। यही कारण है कि हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) टीबी के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गंदगी पर दुनिया में सार्वजनिक जागरूकता फैला रहा है और दुनिया से टीबी के खात्मे की कोशिशों में तेजी से उभरने के लिए ये दिन मनाता आ रहा है।
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