आखिरकार मांग पूरी:5 तहसील, 1 नगर पालिका, 5 नपं 8 थाने, दो चौकी, सात तहसीलों के साथ सक्ती बनेगा जिला

- राजनीतिक मायने; आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस की नजर क्षेत्र की तीनों विधानसभा सीटों पर, प्रचार में आए सिद्धू ने 16 नवंबर को मंच से की थी घोषणा
- 2018 में की थी घाेषणा 1002 दिन बाद हुई पूरी
प्रदेश की सबसे पुरानी तहसील सक्ती को जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। दोनों राजनीतिक दलों ने इसे चुनाव के समय मुद्दा भी बनाया, लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही थी। आखिरकार कांग्रेस की सरकार ने क्षेत्र की जनता की मांग पूरी कर दी है। सीएम भूपेश बघेल ने प्रदेश में तीन नए जिले के साथ सक्ती को भी जिला बनाने की घोषणा कर दी है।
इस जिले में पांच तहसील, एक नगर पालिका, पांच नगर पंचायतें, आठ थाने, दो चौकी व सात तहसील शामिल होंगी। सक्ती को जिला बनाने का मुद्दा प्रदेश के दोनों ही राजनीतिक दलों ने उठाया था। पूर्व सरकार के कार्यकाल में भी कई बार यह मांग उठी थी। एक बार चुनाव प्रचार के लिए आए पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने मंच से कहा था कि जब बारी आती है, उस समय आप लोग बदल देते हैं। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद के साथ भाजपा उम्मीदवार को चुनाव में समर्थन किया, पर वादा पूरा नहीं हुआ।

2018 में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सक्ती विधानसभा से चुनाव मैदान में थे। उनके लिए प्रचार करने के लिए पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू आए थे। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय मैदान में 16 नवंबर 18 को घोषणा की थी, कि उनकी पार्टी की सरकार बनी तो एक महीने में सक्ती को जिला बनाया जाएगा। अब 1002 बाद वह वादा पूरा हुआ है। जिला बनाओ संघर्ष समिति द्वारा भी धरना प्रदर्शन वगैरह किए गए हैं। जनवरी में सीएम भूपेश बघेल आए थे तो राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने भी सक्ती को जिला बनाने की मांग की थी। जिले में सक्ती ब्लॉक में आदिवासी, राठौर, साहू व पिछड़ा वर्ग के लोग अधिक हैं।
2023 के विधानसभा सीट के लिए दावेदारी भी शुरू
सक्ती को जिला बनाने के राजनीतिक मायने भी है। इसके अंतर्गत आने वाली तीनों विधान सभा सीट सक्ती, चंद्रपुर, जैजैपुर कांग्रेस के लिए आसान नहीं रही हैं। मालखरौदा के विलोपित होने के बाद विधान सभा जैजैपुर अस्तित्व में आई है। यहां से पिछले दो चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। यह सीट फिलहाल बहुजन समाज पार्टी के पास है। अगला चुनाव भी इस सीट से बसपा विधायक केशव चंद्रा लड़ेंगे। चंद्रपुर में भी भाजपा से कड़ी टक्कर कांग्रेस को मिलती रही है, अभी यहां कांग्रेस के विधायक रामकुमार यादव है। यहां से युद्धवीर सिंह जूदेव का दावा लगातार बना हुआ है। इस बार पूर्व आईएएस ओमप्रकाश चौधरी की भी दावेदारी की चर्चा होने लगी है। वहीं सक्ती से भी लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार सफल नहीं हो पाए हैं। नया जिला बनाने का फायदा कांग्रेस उठाना चाहेगी। इस बार हो सकता है विस अध्यक्ष डॉ. महंत अपने चिरंजीव सूरज महंत को यहां से चुनाव लड़ाकर उनके राजनैतिक कॅरिअर की शुरुआत कर दें।
जांजगीर-चांपा से बड़ा हो सकता है सक्ती जिला
जांजगीर-चांपा जिला में नौ ब्लॉक हैं। 5 सक्ती जिले में जा सकते हैं। 5 नगर पंचायतें, 7 तहसील व एक प्रस्तावित तहसील अड़भार भी जिले में आएगी। 8 थाने, 2 चौकी भी जा सकती है, जबकि जांजगीर-चांपा जिला 4 ब्लॉक पामगढ़, नवागढ़, अकलतरा व बलौदा तक सीमित होगा। जनसंख्या की दृष्टि से भी सक्ती जिला बड़ा हो जाएगा। यदि 5 ब्लॉक वहां शामिल होंगे तो जनसंख्या 9 लाख 13 हजार 307 हो जाएगी। शेष जांजगीर-चांपा जिले की जनसंख्या 706400 हो जाएगी।
चांपा रह सकता है जांजगीर में
चांपा तहसील कहां जाएगी इस पर भी कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल इसकी संभावना अधिक है कि चांपा तहसील को जांजगीर में रही रखा जा सकता है, क्योंकि सक्ती में जोड़ने पर विरोध हो सकता है। एक तो चांपा के लोगों को जिला मुख्यालय जाने के लिए 40 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। दूसरा जाे सबसे बड़ा नुकसान होगा वह जिला मुख्यालय के साथ से नाम कटने का होगा। फिलहाल जिले की पहचान जांजगीर-चांपा के रूप में है। सक्ती में चांपा को शामिल करने पर वह कट जाएगा।
जानिए, अभी इन प्रक्रियाओं से होगा गुजरना
- कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला गठन समिति बनेगी
- समिति में कलेक्टर, एडीएम, संयुक्त कलेक्टर, एसडीएम सक्ती हो सकते हैं।
- जिला बनाने प्रारंभिक प्रकाशन के लिए कलेक्टर प्रस्ताव भेजेंगे।
- राजपत्र में प्रारंभिक प्रकाशन होगा।
- 60 दिनों के अंदर दावा आपत्ति मंगाई जाएगी।
- दावा आपत्ति का निराकरण कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।
- फिर फाइनल प्रस्ताव भेजा जाएगा, फिर राजपत्र में अंतिम प्रकाशन होगा।
- इसके बाद ही जिला अस्तित्व में आएगा।



