इस हौसले को सलाम:इंद्रावती नदी पार झंडा फहराने जा रहे टीचर की नाव पलटी, घंटों बीच चट्टान में फंसा रहा; लोगों ने बचाई जान फिर पूरे शान के साथ किया ध्वजारोहण

बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी में तेज बहाव के चलते एक लकड़ी की छोटी नाव पलट गई। नाव में सवार शिक्षक हांदावाड़ा गांव की स्कूल में तिरंगा फहराने जा रहा था। इस बीच पानी के तेज बहाव की वजह से नाव में सवार शिक्षक समेत अन्य 3 ग्रामीण काफी दूर तक बहे। 2 ग्रामीणों ने तैर कर अपनी जिंदगी बचा ली थी। लेकिन शिक्षक और 1 ग्रामीण उफनती नदी के बीच चट्टान में घंटों फंसे रहे। यहां जिंदगी और मौत के बीच दोनों जंग लड़ रहे थे। कुछ घंटों के बाद गांव के ही अन्य ग्रामीणों ने इन्हें लकड़ी की छोटी नाव के सहारे बाहर निकाला है। इसके बाद भी शिक्षक ने हार नहीं मानी और नदी पार कर स्कूल में बच्चों के साथ तिरंगा फहराया है।

नदी पार करने लकड़ी की नाव ही सहारा
दरअसल, इंद्रावती नदी के मुचनार-कोड़नार घाट पर पुल नहीं है। इस इलाके के दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीणों का लकड़ी की छोटी डोंगी (नाव) ही एक मात्र सहारा है। बारिश की वजह से पिछले 2 दिनों से इंद्रावती नदी पूरी तरह शबाब पर है। इस बीच इंद्रावती नदी के पार धुर नक्सल प्रभावित हांदावाड़ा गांव के स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक व इलाके के अन्य ग्रामीण नाव के सारे नदी पार कर रहे थे। एक तरफ तेज झमाझम बारिश तो वहीं दूसरी तरफ उफनती इंद्रावती नदी के बीच ग्रामीणों की नाव पलट गई। पानी के तेज बहाव के चलते नाव में सवार सभी लोग काफी दूर तक बह गए।

नेटवर्क नहीं था, इसलिए संपर्क नहीं हो पा रहा था
हालांकि 2 ग्रामीण तैरते हुए नदी के दूसरे किनारे पहुंच गए और अपनी जिंदगी बचा ली। लेकिन, शिक्षक समेत अन्य एक ग्रामीण चट्टान में घंटों फंसे रहे। यहां नेटवर्क नहीं होने की वजह से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे शिक्षक व ग्रामीण किसी से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। लेकिन 2 ग्रमीण जिन्होंने तैरते हुए नदी पार की वे पहले पास के ही गांव गए, इस घटना की जानकारी दी। जनकारी मिलते ही कुछ और ग्रामीण घाट पहुंचे। जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर फिर उसी तरह की एक नाव में दोनों ग्रामीणों को बचाने नाव को पानी में उतारा। घंटों बाद कड़ी मशक्कत कर इन दोनों को पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हादसे के बाद भी शिक्षक के नहीं रुके कदम
इलाके के ग्रामीणों के अनुसार, जब नाव पलटने की घटना हुई उसके बाद दोबारा किसी ने उफनती नदी को पार करने का नहीं सोचा। लेकिन शिक्षक ने स्कूल में आजादी का पर्व मनाने की बात कही और वापस लकड़ी की छोटी नाव में सवार होकर इंद्रावती नदी को पार किया। फिर दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले की सरहद पर स्थित हांदावाड़ा की स्कूल पहुंचा। यहां इलाके के स्कूली बच्चों के साथ टीचर ने तिरंगा फहराया। शिक्षक के इस जज्बे की हर कोई तारीफ कर रहा है। हम सुरक्षागत कारणों से शिक्षक का नाम और उसकी तस्वीर इस खबर के माध्यम से प्रकाशित नहीं कर रहे हैं।
सुरक्षा के नहीं हैं कोई प्रबंध, मोटर बोट भी है खराब
इलाके के ग्रामीण जोगा, दिनेश सहित अन्य ने बताया कि, मुचनार-कोड़नार घाट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम प्रशासन के द्वारा नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों की सुविधा के लिए प्रशासन ने उन्हें मोटर बोट जरूर दिया था लेकिन वह भी खराब पड़ा है। साथ ही लाइफ जैकेट की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि प्रशासन ने बारिश के समय किसी भी ग्रामीणों को लकड़ी की छोटी नाव से नदी पार करने मना किया था। इसके लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया है।



