इतिहास को समेटे है जयस्तंभ चौक:15 अगस्त 1974 को इसी जगह हुआ था ध्वजारोहण, झंडा फहराने से पहले रात भर चली थी पूजा

आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त थी वह दिन था जब भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। ना जाने कितने देशभक्तों ने आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। बिलासपुर में भी इस आजादी को लेकर लोगों में बेहद उत्साह था। बिलासपुर का जयस्तंभ चौक आज भी इस बात का गवाह है।

आजादी की लड़ाई में बिलासपुर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बिलासपुर के 243 स्वतंत्रता सेनानियों ने इस आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। बिलासपुर में 15 अगस्त 1947 को ही शनिचरी पड़ाव चौक पर 1932 में जहां गांधी जी की सभा हुई थी, जहां पर जयस्तंभ की नींव रखी गई। देश के शहीदों व महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में इस दिन पूरे देश में एक साथ जयस्तंभ की नींव रखी गई।
गांधीजी को देखने उमड़ी थी भीड़, लोगों ने उनके चरणों की धूल तक को उठाया
जिस वक्त गांधीजी का आगमन हुआ उस समय दूर दूर से लोग उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे। उस समय आवागमन के साधन कम थे। लोग बैलगाड़ी और साइकिल में सफर किया करते थे। अरपा में बैलगाड़ी और साइकिलों की इतनी भीड़ थी कि लोधीपारा से लेकर रपटा के आगे तक लाइन लगी रही। सभी उनके दर्शन के लिए व्याकुल थे गांधीजी समय – समय पर आकर घर की छत से लोगों को देख रहे थे। शाम को उनकी सभा शनिचरी पड़ाव में रखी गई थी। अथाह भीड़ के बीच गांधीजी ने हरिजन उद्धार के लिए भाषण दिया और हरिजन उद्धार संघका अध्यक्ष पंडित रामगोपाल तिवारी मुंगेली वाले को बनाया। उस समय सभा स्थल पर एक बैनर टंगा हुआ था जिसमें अंकित था- ‘ सुनेरी मैंने निर्बल के बल राम ‘। बापू के प्रेम का यह प्रभाव था कि उनकी सभा के लिए बनाए गए मंच की एक – एक ईंट, पत्थर और मिट्टी सभा के बाद लोग अपने साथ ले गए। उनके चरण जहां – जहां पड़े थे धूल तक लोगों ने उठा ली।
ध्वजारोहण से पहले रात भर चली थी पूजा
बिलासपुर के कांग्रेसी नेता शिवा मिश्रा बताते है कि गांधी जी के बिलासपुर आगमन पर शनिचरी पड़ाव चौक पर भारत का झंडा फहराया गया था। उस वक्त उनके दादा स्व. डॉ शिव दुलारे मिश्रा भी वहां पर मौजूद थे। उन्होंने बताया की इस खास मौके पर शहर में इतनी भीड़ हो गई थी कि पांव रखने तक की जगह नहीं बची थी। जैसे ही देश के आजाद होने की खबर लोगों तक पहुंची 14 अगस्त की आधी रात से लेकर 15 अगस्त की सुबह तक शनिचरी पड़ाव चौक पर पूजा पाठ का आयोजन किया गया। यह पूजा शुद्धि प्रक्रिया के तौर पर की गई थी।



