अजब-गजब:दावा, 50 हजार नगदी और 80 हजार के जेवर खा गए हाथी, उनकी लीद में तलाश रहे अवशेष

- ईरागांव में किसान के घर 9 अगस्त को आ धमके थे हाथी, तोड़फोड़ कर अनाज भी खा गए
- किसान ने मांगा नगदी, जेवर व घर के नुकसान का मुआवजा, रेंजर बोले- जांच कराएंगे
जिले के नरहरपुर, भानुप्रतापपुर तथा चारामा विकासखंड हाथी प्रभावित इलाकों में शामिल होते जा रहे हैं। अब तक तो इन इलाकों में पहुंचे हाथियों का दल पर मकानों को तोड़ देता था, अनाज और फसल खा लेता था लेकिन पहली बार इन पर 50 हजार रूपए नगदी रकम तथा 80 हजार के जेवर खाने दावा किसान ने किया है। यह दावा सुन वनविभाग भी सकते में है। साथ ही पीड़ित किसान ने उक्त रकम व जेवर दिलाने की मांग की है। अब कहा जा रहा है जंगल में मिलने वाले हाथियों की लीद में जेवर के अवशेष तलाशे जाएंगे। इधर पीड़ित किसान तथा उसके कुछ साथियों ने जेवरों को लीद में खोजने तलाशी भी शुरू कर दी है।
पिछले तीन दिनों से भानुप्रतपपुर वनपरिक्षेत्र के ईरागांव में हाथी पहंुच लगातार तोड़ फोड़ कर रहे हैं। 9 अगस्त की रात जब हाथी दोबारा इलाके में आए तब ईरागांव में किसान देवराज आंचला के मकान में तोड़फोड़ कर वहां से अनाज व अन्य चीजों को खा गए थे। हाथी को देख किसान व उसका परिवार घर छोड़ कर भाग गया था। हाथियों के जाने के बाद लौटा तो सबसे पहले घर में रखी रकम व जेवर से भरी पोटली को तलाश की लेकिन वह नहीं मिली। किसान देवराज ने बताया पिछले साल बेचे गए धान की रकम 50 हजार को इस साल खेती किसानी के लिए रखी थी। घर में उपयुक्त जगह नहीं होने के कारण रकम व 80 हजार के सोने चांदी के जेवर को पोटली में बांध कमरे में रखा था जिसे हाथियों ने खा लिया। उक्त रकम व जेवर कहीं नहीं मिले। मकान में भी कहीं दबा हुआ नहीं था। ग्रामीण ने बताया हाथियों की लीद में अवशेष भी तलाश कर रहे हैं। मकान के नुकसान साथ साथ उक्त नगदी व जेवर का भी वन विभाग से मुआवजा देने की मांग की गई है।
रुपए और जेवर खाने की किसान ने जानकारी दी: रेंजर
रेंजर मुकेश नेताम ने कहा कि ग्रामीण ने जानकारी दी है कि 50 हजार व सोने चांदी के जेवर हाथियों ने खा लिया है। हालांकि यह प्रमाणित नहीं हो पाया है कि हाथियों ने खाया या कहीं और गायब हो गया है। इसकी जांच कराई जाएगी।
न दिन में काम कर सकते न रात में चैन से सो सकते
हाथी प्रभावित गांव ईरागांव के ग्रामीणों व किसानों ने जिला प्रशासन से सुरक्षा देने मांग की है। भानुप्रतापपुर एसडीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि गांव में हाथियों की दहशत बनी हुई है। पड़ोसी जिले बालोद में हाथी एक ग्रामीण की हत्या भी कर चुके हैं। यदि दिन में काम करने खेत या जंगल जाते हैं तो हाथियों का डर बना रहता है। रात में भी आराम से घर में सो नहीं सकते हैं। मांग करने वाले किसानों में चैतुराम आंचला, मंगतूराम नेताम, कपिल देव, छबीराम दुग्गा, नितेश कोरेटी, दीनू राम गावड़े, बीरबल गावड़े, दया सिंह, जसराज आदि शामिल हैं।
इधर, नरहरपुर में भी पहुंचे तीन टस्कर हाथी
भानुप्रतापपुर के आसपास हाथियों का एक दल मौजूद है जो वर्तमान में बालोद जिले के डौंडी वन परिक्षेत्र के लिमऊडीह इलाके के जंगल में है। इसके अलावा दूसरा दल अब नरहरपुर के आसपास भटक रहा है। इसमें तीन टस्कर हाथी हैं जिन्होने बुधवार रात नरहरपुर के थानाबोड़ी में एक मकान में तोड़फोड़ की। गुरुवार रात ये हाथी ग्राम बहनापानी में थे। वर्तमान में इनका लोकेशन ग्राम पंचायत मारवाड़ी व मुरूमतरा के आसपास होना बताया जा रहा है। रेंजर कैलाश ठाकुर ने बताया कि इलाके में मुनादी करा दी गई है। पूरी टीम हाथियों पर नजर बनाए हुए है।



