कबीरधाम विशेष

बेरोजगारों से 23 लाख रुपए की ठगी:पार्टी नेताओं के साथ अपनी फोटो दिखाकर देता था झांसा, कोतवाली पुलिस बताती रही फरार

  • मास्टरमाइंड त्रिलोक गिरफ्तार, महासमुंद में जनता कांग्रेस का पदाधिकारी रहते झांसे में लिया, अभी है कांग्रेस में

आयकर, पुलिस, खाद्य विभाग और बिजली कंपनी में नौकरी लगाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से 22.99 लाख रुपए की ठगी हुई है। मामले में मास्टर माइंड त्रिलोक प्रताप सिंह को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि आरोपी त्रिलोक प्रताप महासमुंद में छग जनता कांग्रेस (जोगी) के पंचायतीराज विभाग का जिलाध्यक्ष रह चुका है। विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में शामिल हो गया, लेकिन किसी पद पर नहीं था।

अपने इसी पॉलिटिकल स्टेटस और पार्टी नेताओं के साथ खिंची तस्वीरें दिखाकर आरोपी ठगी करने बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेता था। मिली जानकारी के मुताबिक मुख्य मास्टर माइंड त्रिलोक प्रताप सिंह पिता गैमुन सिंह मचेवा (महासमुंद) का रहने वाला है। मामला वर्ष 2017- 18 का है। आरोपियों ने अलग- अलग गांव के 10-12 शिक्षित बेरोजगार युवाओं को आयकर विभाग, पुलिस, खाद्य विभाग और बिजली कंपनी में नौकरी लगाने का झांसा दिया।

इसके एवज में किसी से ढाई लाख रुपए, तो किसी से साढ़े 3 लाख रुपए मांग की। सरकारी नौकरी पाने की चाहत में युवाओं ने रकम तो दे दिए, लेकिन दो साल बाद भी नौकरी नहीं लगी। जब पीड़ित युवकों ने रकम वापस मांगा, तो 9 महीने तक घुमाते रहा। पीड़ित युवकों की शिकायत पर कोतवाली थाने में आरोपी के खिलाफ धारा 420, 34 के तहत एफआईआर दर्ज है।

पंचायतीराज विभाग का जिलाध्यक्ष रह चुका है
आरोपी त्रिलोक प्रताप पूर्व में महासमुंद में छग जनता कांग्रेस (जोगी) के पंचायतीराज विभाग का जिलाध्यक्ष था। इसी दौरान उसने अमित जोगी के साथ फोटो खिंचवाई थी जिसे दिखाकर वह बेरोजगार युवाओं को फांसने के लिए यकीन दिलाता था कि वह बड़ा नेता है। वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर वह कांग्रेस में शामिल हो गया। हालांकि, उसे कोई पद नहीं दिया गया था। ठगी के मामले में एफआईआर के बाद भी वह पार्टी गतिविधियों में सक्रिय था।

इस तरह आरोपियों ने ठगी के लिए बनाया गैंग
ठग गिरोह में 3 सदस्य थे। मास्टर माइंड त्रिलोक प्रताप सिंह था। वहीं चिराग पाली व मुश्ताक खान उसके लिए काम करते थे। दरअसल, त्रिलोक प्रताप ने पूर्व में अपने ही साथियों को नौकरी के नाम पर ठगा था। नौकरी न लगवा पाने और रकम वापस न दिला पाने की स्थिति में बेरोजगार युवाओं से ठगी करने उन्हें अपने प्लान में शामिल कर लिया। इस तरह चिराग व मुश्ताक का काम बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेकर त्रिलोक से मिलाने का था। इसी के जरिए वह कबीरधाम जिले में बेरोजगारों को फांसने लगा था।

पीड़ित परिवार की माली हालत खराब ; नौकरी पाने किसी ने जमीन बेची, तो किसी ने ब्याज पर लिया उधार
केस 1. जमीन बेचकर डेढ़ लाख रुपए दिया:
 पीड़ित देवराज साहू ने झांसे में आकर बिजली कंपनी में क्षेत्राधिकारी कार्यभारित परिचारक श्रेणी- 3 लाइन के पद पर भर्ती के लिए ठगों को पैसा दिया था। पिता ने जमीन बेचकर 1.50 लाख रुपए जुटाया था। ठगों के पैसा देने के बाद उसे गुढ़ियारी (रायपुर) के बिजली सब- स्टेशन में 3 महीने ट्रेनिंग दिलाई गई, लेकिन नौकरी नहीं लगवाई।

केस 2. रिश्तेदार से ब्याज पर उधार लिया: पीड़ित उदय साहू ने खाद्य विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर पद की भर्ती के लिए आरोपियों को 3.50 लाख रुपए दिया था। ये रकम पीड़ित ने अपने मौसा से ब्याज में उधार लिया था। वहीं पीड़ित मुकेश साहू से कृषि विभाग मे कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए 2.50 लाख रु., हुमलाल पटेल को आयकर विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर में गोपनीय भर्ती के लिए 5 लाख रु. वसूले थे।

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