अब जाति प्रमाण पत्र बनाने मिसल जरूरी नहीं, जाति प्रमाण पत्र बनाने के नियम को शासन ने किया सरल


11 अगस्त 2021। स्कूली बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनना अब आसान हो गया है। जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब मिसल बंदोबस्त की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय निकायों व पंचायतों की सामान्य सभा से उनका अनुमोदन मान्य कर लिया जाएगा। यह व्यवस्था सामान्य प्रशासन विभाग ने दी है। दुर्ग संभाग में 34247 जाति प्रमाण पत्र बनवाए जाने हैं। अब तक ये प्रक्रिया रही : आदिवासी विकास विभाग स्कूलों को जाति प्रमाण पत्र का फार्म भेजता है। 1984 के पूर्व का होने पर पिता का दाखिला पंजी, मिसल और जमीन के दस्तावेज जांचे जाते थे।
कोरोना की वजह से हर जगह प्रभावित हुआ जाति प्रमाण पत्र बनाने का काम
दुर्ग जिले सहित संभाग में मिडिल स्कूल से लेकर हायर सेकंडरी स्कूलों के बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला शिक्षा विभागों को पहले से ही निर्देश मिले हुए हैं। दुर्ग जिले में दुर्ग, पाटन और धमधा ब्लॉक में कोरोना संक्रमण से पहले शिविर लगाकर जाति प्रमाण पत्र बनवाए जा रहे थे। कोरोना संक्रमण की वजह से यह शिविर बंद हैं। जिसकी वजह से जाति प्रमाण पत्र बनाने की पेंडेंसी बढ़ी है। सामान्य प्रशासन ने जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल कर दिया है।
जाति प्रमाण पत्र के पेंडेंसी की दो मुख्य वजह
भू अभिलेख शाखा में मिसल रिकॉर्ड खराब
जाति प्रमाण पत्र के लिए जमीन का मिसल दस्तावेज अनिवार्य है। सालों पुराने दस्तावेज भू अभिलेख शाखा से मिलता है। भू अभिलेख शाखा में दस्तावेज सालों पुराने होने की वजह से जीर्ण-शीर्ण हाल में हैं। इसकी वजह से लोगों को मिसल नहीं मिल पा रहा है। लोग यहां का चक्कर काट रहे हैं।
स्कूल बंद इसलिए फार्म नहीं भरा, येे भी दिक्कत
स्कूल जिन बच्चों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बना उसे आइडेंटिफाई करता। इस बच्चे के पालक को बुलाकर फार्म भरवाते। एक साथ यह फार्म तहसीलदार कार्यालय में जमा होता। तहसीलदार एक साथ आवेदनों की जांच करके प्रमाण पत्र जारी करते। 15 महीने तक स्कूल बंद रहा।
तहसील में रोजाना चक्कर काटते हैं पालक व बच्चे
जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार जारी करते हैं। इसलिए पालक और बच्चे तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे है। चंद्रनगर निवासी अंकित कुमार इस साल बारहवीं उत्तीर्ण हुआ है। उसे पिछड़ा वर्ग के कोटे से प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश परीक्षा देना है। आदर्शनगर निवासी रमेश कुमार स्कूल में प्रवेश करवाया है। सर्टिफिकेट जरुरी है।
जानिए जिले सहित पांचों जिले में लंबित आवेदन
दुर्ग संभाग की रिपोर्ट के मुताबिक दुर्ग संभाग में कुल 1.88 लाख जाति प्रमाण पत्र बनाने का टारगेट तय है। जिसमें से 1.54 लाख अब तक बनाया जा सका है। 34247 जाति प्रमाण पत्र बनाना लंबित है। दुर्ग जिले में 2517 जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा सके। बालोद जिले में 3196, बेमेतरा जिले में 10430, कबीरधाम जिले में 890 और राजनांदगांव जिले में 17217 जाति प्रमाण पत्र बनाना पेडिंग हैं।



