रायपुर जिला

नहीं बची खेलों की नर्सरी:गंज मैदान को बना दिया पार्किंग, अवैध कब्जे में हिंद स्पोर्टिंग का फुटबॉल ग्राउंड, इसलिए शहर में बच्चों का खेल ही खत्म

दो दशक पहले शहर में छोटे-बड़े 50 से ज्यादा खेल मैदान थे, हर मोहल्ले में एक न एक मैदान ऐसा था जहां बच्चे कई तरह के खेल खेलते थे, लेकिन तेज शहरीकरण और जगह के इस्तेमाल की आड़ में घने शहर ही नहीं बल्कि आउटर के मैदान भी तकरीबन खत्म कर दिए गए हैं। किसी मैदान में निजी निर्माण हुआ तो कहीं सरकारी इमारतें तान दी गईं। किसी मैदान की जगह सड़कों के लिए ली गई और वह आंगन में तब्दील हो गया। देवेंद्र नगर, टैगोर नगर, शैलेंद्र नगर जैसी कॉलोनियों के प्लेग्राउंड में स्कूल और मंदिर बना दिए गए हैं।

ईदगाहभाठा का सबसे चर्चित हिंद स्पोर्टिंग मैदान कब्जे में खत्म हो गया है। गंज मंडी का खेल मैदान पार्किंग बन गया है। गांधी मैदान को पहले ही पेवर ब्लाॅक लगाकर पार्किंग में तब्दील किया जा चुका है। यहां तक कि शहर में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए आउटडोर और इनडोर स्टेडियम बनाए तो गए, लेकिन यहां खिलाड़ियों के बजाय खेल संघ या अकादमी चलाने वाले काबिज हो गए हैं।

मैडल जीतना तो दूर, छत्तीसगढ़ का एक भी खिलाड़ी भारतीय ओलिंपिक दल का अब तक हिस्सा नहीं बन पाया है। इसके कई कारण हैं, जिनमें से एक यह भी है कि राजधानी में बच्चे मोहल्लों के जिन मैदानों में प्रैक्टिस करते थे, दो दशक में उनका लगभग खात्मा हो गया है।

भास्कर ने शहर के खेल मैदानों की दुर्दशा की बारीकी से पड़ताल की है। जैसे, साइंस कालेज और इंजीनियरिंग कालेज (अभी एनआईटी) के मैदान शहर के सबसे बड़ा मैदान हुआ करते थे। सुबह छह बजे से इन मैदानों में क्रिकेट, फुटबाल की सैकड़ों टीमें जुट जाती थीं। रविवार के दिन यहां पर एक साथ 40-50 टीमें नजर आती थीं। इस मैदान का बड़ा हिस्सा हाकी स्टेडियम में बदल गया। बचे हुए हिस्से को फुटबाल सहित अन्य अकादमी चलाने वालों को दे दिया गया है।

  • नए खेल मैदान बनाना तो अब मुश्किल है, क्योंकि शहर में जगह ही नहीं है। यह कोशिश की जाएगी कि निगम के स्टेडियम इत्यादि में बच्चों को खेलने की छूट रहे। सुभाष स्टेडियम के मैदान, आउटडोर स्टेडियम आदि में बच्चें चाहे जो भी खेले, उन्हें रोकटोक नहीं की जाएगी। – एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

गंज मंडी मैदान में पार्किंग-गड्ढे
निवेदिता स्कूल के पीछे गंज मंडी का बड़ा सा खेल मैदान अभी आसपास के दुकानदारों के लिए पार्किंग का अड्‌डा बन गया है। शहर के बीचों बीच के इस मैदान में रामसागरपारा, स्टेशन रोड, मौदहापारा, नहरपारा, मांगड़ापारा, केलकरपारा, जवाहर नगर, तात्यापारा, नया पारा आदि मोहल्लों मंे रहने वाले बच्चों के लिए एक बड़ा खेल मैदान था। गंज स्कूल के इस खेल मैदान में पहले क्रिकेट प्रतियोगिताएं होती थीं। जूडो-कराटे की प्रैक्टिस के साथ यहां हॉकी भी होती ती। पूर्व पार्षद जग्गू सिंह ठाकुर ने कहा कि मैदान में पहले मोहन क्लब की ओर से प्रदेशस्तरीय क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताएं होती थीं।

  • बच्चों की दर्जनों टीम यहां सुबह से शाम तक खेलती रहती थी। अब यह पार्किंग का अड्‌डा बन गया है। मैदान में बड़े-बड़े गड्‌ढे हैं।

हिंद स्पोर्टिंग में स्पोर्ट्स नहीं
हिंद स्पोर्टिंग ग्राउंड में कुछ साल पहले तक काफी ज्यादा झोपड़ियां तन गई थीं। मैदान का उपयोग लोग कंस्ट्रक्शन मटेरियल रखने के लिए करने लगे थे। निगम की कार्रवाई के बाद यह रुका, लेकिन अब मैदान में निगम के ही पाइप इत्यादि बिखरे पड़े हुए हैं। डीडी नगर से जीई रोड की तरफ आने वाली सड़क में दाहीने तरफ खाली मैदान था, जिसमें अब आदिवासी छात्रों के लिए हास्टल बना दिया गया है। आसपास के लोगों ने इस मैदान में निर्माण को लेकर विरोध भी किया, लेकिन सरकारी अमले ने यहां हास्टल बना दिया। देवेंद्र नगर का भी बड़ा खेल मैदान पूरी तरह खत्म कर दिया गया।

रिकार्ड में खेल मैदान नहीं
नगर निगम और टाउन प्लानिंग के रिकार्ड में खेल मैदान के रूप में शहर में कोई भी जगह चिन्हित नहीं है। सरकारी एजेंसियों ने नजूल या अन्य खाली जगहों को कभी खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखने का प्रयास ही नहीं किया। नगर निगम रायपुर के नगर निवेशक बीआर अग्रवाल ने कहा कि निगम के रिकार्ड में जो स्टेडियम या बड़े-बड़े खेल परिसर बनाए गए हैं उन्हीं के रिकार्ड हैं। कुछ कालोनियों या सोसाइटियों में उनकी निजी खुली जगह है, जिसे वे खेल मैदान कह सकते हैं। जोन-8 ने पूर्व में जरवाय में खेल मैदान विकसित किया था।

खेलों से मोह भंग होना भी कारण
खेल को लेकर अक्सर लोगों में यह मानसिकता है कि यह ग्रामीण परिवेश में रहने वाले बच्चों का क्षेत्र है। शहर के बच्चे पढ़-लिखकर डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वकील ही बनेंगे। पिछले ढाई-तीन दशक में रायपुर का तेजी से शहरीकरण हुआ है। खेलों के प्रति बच्चे ही नहीं बड़ों का भी मोह खत्म हुआ है। ज्यादातर लोग बच्चों को मोबाइल, लैपटाप या अन्य गैजेट्स उपलब्ध करा रहे हैं। गेम में विडियो गेम, टीवी में बच्चे इतने मशगूल हैं कि वे खेलने के लिए बाहर निकलते ही नहीं। इसलिए मैदान धीरे-धीरे खत्म हो गए।

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