जांजगीर-चाम्पा जिला

केले, भिंडी व भाजी के रेशों से बना रहे राखियां:त्यौहार तक दो लाख राखी बनाने का टारगेट, 10 समूह की महिलाएं ट्रेनिंग के साथ बना रही राखी, बना चुकी हैं रेशे से कपड़े

जिले की महिलाओं ने पहले केला, भिंडी व भाजी के रेशों से कपड़े व जैकेट बनाए थे। जिसकी चर्चा खूब हुई अब महिलाओं उन्हीं रेशों से राखियां भी बना रही हैं। समूह की महिलाओं का टारगेट कम से कम दो लाख राखी बनाने का है, हालांकि अभी यह मंजिल बहुत दूर है, फिर भी इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दस समूह की करीबन सवा सौ से अधिक महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है, वे राखियां बना रही हैं।

बलौदा ब्लॉक के ग्राम बहेराडीह व आसपास की महिलाओं ने करीब चार साल पहले केले के रेशे से कपड़े व जैकेट बनाने की प्लानिंग की। वे इस प्लान पर सफल भी रहे। केले के रेशे से बनाए गए जैकेट बड़े नेताओं तक को भेंट किए गए। लेकिन कोरोना के कारण पिछले डेढ़ साल से इस तरह का काम प्रभावित हुआ है।

महिलाओं ने कपड़ा व जैकेट बनाने के लिए बड़ी मात्रा में अमारी पटुआ, केला, चेंच भाजी, भिंडी व अलसी के रेशे निकाल के रखे थे, लेकिन उसका उपयोग कम हो गया था, इसलिए इस बार उन्हीं रेशों से राखी बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। कुछ दिनों पहले इन महिलाओं ने राजधानी रायपुर में अपनी बनाई राखी की प्रदर्शनी भी लगाई थी। जिसे अच्छा रिस्पांस मिला था। कई सरकारी विभागों के अफसरों ने अपने डिपार्टमेंट्स के लिए इन्हीं राखियों का ऑर्डर दिया है।

सैंकड़ों महिलाओं को मिलेगा रोजगार

रेशों से राखियां बनाने का आइडिया इन महिलाओं को किसान रामाधार देवांगन ने दिया। 64 साल के रामाधार इससे पहले केले के रेशों को मिलाकर कपड़ा बना चुके हैं। उन्होंने ही ये आइडिया महिलाओं को दिया। दीनदयाल यादव ने बताया कि उनके पास ढ़ाई क्विंटल रेशे बचे हुए थे, जिसे राखी बनाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक महिला एक दिनों में ढ़ाई से तीन सौ राखी बना लेती हैं, महिलाओं को देखकर उनके घर के बच्चे भी राखी बनाना सीख गए हैं। इससे बच्चों के साथ महिलाओं को भी राेजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि रॉ मटेरियल उनकी टीम महिलाओं को देती हैं, एक राखी के पीछे एक रुपए महिलाओं को पारिश्रमिक दिया जाता है।

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