बिलासपुर जिला

पक्षियों को बचाने का प्रयास:केज में मोर के अंडे खराब हो जाते हैं, कानन पेंडारी जू में चूजा निकालने लगाई मशीन; ट्रायल सफल रहा तो संरक्षित पक्षियों पर होगा प्रयोग

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू में पक्षियों को बचाने के लिए एक कोशिश शुरू की गई है। पशु चिकित्सक पक्षियों के अंडो से चूजा निकालने का प्रयास कर रहें है। इसके लिए हेचरी मशीन मंगाई गई है, इसकी कीमत 8 हजार रुपए है। इसमें ट्रायल के रूप में मोर के 6 अंडे रखे गए हैं। निर्धारित तापमान में मशीन के अंदर इन अंडो को रखा गया है। अगर इन अंडो से मोर के चूजे निकल आए और ट्रायल सफल रहा तो संरक्षित पक्षियों पर भी इनका प्रयोग किया जाएगा।

कानन पेंडारी जू में रहता है मोर का जोड़ा।
कानन पेंडारी जू में रहता है मोर का जोड़ा।

अधिकतर समय खराब या फिर फूट जाते है मोर के अंडे
कानन के पशुचिकित्सक डॉ. अजीत पांडेय ने बताया कि जू में मोर का जोड़ा तो है, लेकिन इनकी संख्या बढ़ नहीं पा रही है। ज्यादातर अंडे केज के अंदर ही खराब हो जाते है या फिर फूट जाते हैं। मादा मोर इन्हें से नहीं पाती। ऐसे में अब कानन के मोर का दिया हुआ अंडा हेचरी मशीन में रखकर उससे चूजा निकालने का ट्रायल कर रहें हैं।

32 दिन में फूटता है अंडा
डॉ. अजीत ने बताया कि समान्यता मुर्गी के अंडे से 28 से 30 दिन में चूजा निकलता है। वहीं मोर के अंडे में से 32 दिन में चूजा निकल जाता है। ये अंडे निषेचित होंगे क्योंकि हमारे केज में नर और मादा एक साथ रहते हैं। यदि 32 दिन में अंडे से चूजा निकल गया तो ट्रायल सफल हो जाएगा।

डॉ. चंदन ने कई बार कोशिश की पर सफल नहीं हुए
कानन में इससे पहले ही मोर के अंडे से चूजा निकाले का प्रयास जू के ही डॉ. चंदन भी कर चुके हैं, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। उन्होंने मोर के अंडे को मुर्गी के गोरसी में रख कर सेवाया। पशुपालन विभाग के कोनी स्थित कुक्कुट पालन केन्द्र के हेचरी मशीन में भी रखा। साथ ही लोकल स्तर पर फार्म चलाने वालों को भी दिया लेकिन इतने प्रयास के बाद भी वो अंडे से मोर का चूजा नहीं निकाल पाए। ऐसे में अब जू प्रबंधन ने खुद मशीन खरीद कर उसमें ट्रायल करने का फैसला लिया है।

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