कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

502 दिनों बाद खुले स्कूल:शहरी क्षेत्र में थर्मल स्क्रीनिंग-सैनिटाइज करने के बाद दिया प्रवेश, अंदरूनी क्षेत्र में शिक्षक पहुंचे नहीं, खेलकूद कर ही लौट गए छात्र

कोरोना संक्रमण के चलते बंद स्कूल अंतत: 502 दिनों बाद 3 अगस्त को खुले। जिले में पहले दिन दो तरह की तस्वीरें सामने आई। शहरी क्षेत्रों में अधिक संख्या में छात्र स्कूल पहुंचे जहां उनकी थर्मल स्क्रीनिंग करते टेम्प्रेचर भी लिया गया। बहुत से छात्र तो अपने साथ सैनिटाइजर लेकर भी पहुंचे थे। दूसरी ओर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों का नजारा कुछ अलग था। बहुत से गांव में छात्र तो स्कूल पहुंच गए लेकिन शिक्षकों के नहीं पहुंचने से स्कूलों के ताले ही नहीं खुले।

लंबे समय बाद आपस में मिले छात्र घंटा दो घंटा स्कूल परिसर में खेलकूद कर वापस लौट गए। जहां स्कूल खुले वहां भी शुरूआत सामान्य दिनों की तरह प्रार्थना से नहीं की गई क्योंकि कोविड गाइडलाइन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने इसकी मनाही थी।

शीतलापारा हाईस्कूल में 10वीं कक्षा के 42 में से 20 स्कूल पहुंचे। सभी मास्क लगाकर पहुंचे थे तथा कुछ तो बाकायदा साथ सैनिटाइजर लेकर भी पहुंचे थे। छात्रा आशियाना बानो, अंवितका जैन, आशुतोष नेताम, शारदा यादव, छात्र आशुतोष नेताम, चांद खान ने कहा स्कूल खुलने से काफी खुश हैं क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई में बहुत सी चीजें समझ नहीं आती थी। स्कूल में पढ़ाई करने से शिक्षकों के अलावा कुछ समझ नहीं आने पर साथी छात्रों से समझ लेते हैं।

अन्नपूर्णापारा मिडिल स्कूल में बच्चों का स्वागत तिलक लगाकर प्रधान शिक्षकों ने किया। एसेबेड़ा हायर सेकेंडरी में भी शिक्षक, प्राचार्य और शाला विकास समिति सदस्यों ने बच्चों का स्वागत तिलक लगाकर किया।

राजापारा प्राथमिक शाला भवन में कई बार वैक्सीनेशन हो चुका है इस कारण स्कूल प्रबंधन ने कक्षाएं नए भवन में नहीं लगाकर पुराने भवन में लगाई। लट्‌टीपारा कन्या शाला प्राचार्य सविता पोया ने कहा अभी सभी कक्षाओं की छात्राओं को नही बुलाया जा रहा है।

हाथों को सैनिटाइज कर व थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद ही प्रवेश दिया गया। शीतलापारा हाईस्कूल प्राचार्य देवनारायण बजरंग ने कहा अभी शासन के आदेश पर सिर्फ 10वीं के बच्चो को ही बुलाया जा रहा है। ग्राम सरंगपाल को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है जिसके चलते 3 अगस्त को यहां स्कूल नहीं लगा। शिक्षक स्कूल पहुंचे थे तथा कार्यालयीन काम कर लौट गए। प्रधान अध्यापक गोविंद शार्वा ने कहा सरंगपाल में कोरोना संक्रमण ज्यादा होने के कारण एहतियात बरतते छात्रों को नहीं बुलाया गया। जब तक सभी स्वस्थ्य नहीं हो जातो स्कूल नहीं लगेंगी।

इधर अंदरूनी गांव में छात्र तो पहुंचे शिक्षक नहीं
जिले के प्राय: अंदरूनी गांव में छात्र तो पहुंच गए लेकिन शिक्षकों के नहीं पहुंचने से स्कूलों में ताले लटकते रह। कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम पीवी 123 इंद्रपुरी में पदस्थ एकमात्र शिक्षक अहिंद्रा राय स्कूल नहीं पहुंची। यहां सुबह 10 बजे 9 छात्र पहुंच गए थे। काफी दिनों बाद स्कूल में मिलने से छात्र आपस में खेलकूद करते रहे तथा फिर लौट गए। ग्रामीणों ने कहा ये तो हमारे गांव की आए दिन की कहानी है।

शिक्षक कभी कभार ही पहुंचते हैं। शिकायत करते थक गए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो अब शिकायत तक करना बंद कर चुके हैं। इधर शिक्षा विभाग दावा कर रहा है कि कोयलीबेड़ा विकासखंड में पहले दिन सभी 602 स्कूल खुली लेकिन पीवी 123 इंद्रपुरी की तरह और भी बहुत सी स्कूल खुले ही नहीं जो विभाग के आंकड़े फर्जी होने की कहानी बयां कर रही है।

जो पालक सहमत उनके ही बच्चों को बुलाया जा रहा : प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एलसी कावड़े ने कहा छात्रों को स्कूल बुलाने पालकों की सहमति जरूरी है। जिन छात्रों के पालकों की सहमति है उन्हें ही स्कूल बुलाया जाना है।

हाॅस्टल खोलने अनुमति नहीं : हास्टल में रहने वाले छात्र पहले दिन स्कूल नहीं पहुंच पाए क्योंकि अभी स्कूलंे तो खोल दी गई है लेकिन हास्टल खोलने अनुमति नहीं मिली है। हॉस्टलों में दूर गांव में रहने वाले छात्र रहते हैं। यही कारण है की हास्टल नहीं खुलने से वे स्कूल में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं।

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