कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

हड़ताल समाप्त:आश्वासन मिलने पर 8 दिन बाद खुले लैम्पसों के ताले, काम पर लौटे कर्मी

पांच सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के सभी 70 लैम्पों के 450 कर्मचारी 24 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल में पूरे प्रदेश के लैम्पों के कर्मचारी शामिल थे। 30 अगस्त तक मांगों को पूरा करने के मिले आश्वासन पर आठ दिनों बाद लैमप्सों कर्मी हड़ताल समाप्त कर सोमवार से काम पर लौटे।

पांच सूत्रीय मांग को लेकर पूरे प्रदेश के लैमप्स कर्मचारी 24 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। इससे किसानों काे खाद, बीज के साथ लोन व अन्य दूसरे काम प्रभावित हो रहे थे। इनकी प्रमुख मांग धान खरीदी में सूखत एवं अतिरिक्त खर्च देने की है। धान परिवहन देरी से होने के कारण सूखत आता है जिसका खामियाजा लैम्प्स को भुगतना पड़ता है जबकि नियम खरीदी के 72 घंटो में धान के उठाव का है। लैम्प्सों ने सूखत की राशी समितियों को लौटाने की मांग की थी। इसके अलावा सहकारी समितियो में कार्यरत 2058 कर्मचारियो को सातवां वेतनमान देने के साथ नियमितीकरण करने की मांग थी। हड़ताल के चलते किसानों को हो रही परेशानी को देखते रायपुर में सरकार के साथ प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों की बैठक हुई। मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में सहकारिता मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, सहकारिता सचिव व पंजीयक हिमशंकर गुप्ता, अपेक्स बैंक अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राक, रायपुर ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष पंकज शर्मा शामिल हुए। जिसमें पांचो मांगों को लेकर कमेटी बनाकर सकरात्मक पहल करने आश्वासन दिया गया।

सरकार से सकरात्मक पहल किए जाने के बाद महासंघ ने 30 दिनों के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है। 30 अगस्त तक मांगे पूरी नहीं हुई तो फिर से हड़ताल की जाएगी। सप्ताह भर तक काम बंद होने से अब कर्मचारी पुराने लंबित कामों को निपटाने में जुट गए हैं। कांकेर लैंमप्स संघ से जुड़े नरेंद्र साहू ने कहा अभी मांग पूरी नही हुई है। सिर्फ आश्वासन मिला है। इसके चलते हड़ताल स्थगित की गई है। 30 दिनों में मांगे पूरी न होने पर फिर से आंदोलन किया जाएगा।

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