दंतेवाड़ा जिले में बदला माहौल, फिर से लगेंगी कक्षाएं:जिस स्कूल को नक्सलियों ने तोड़ा था, उसे सरेंडर के बाद खुद बनवाया; 7 साल बाद अब वहीं पढ़ेंगे बच्चे

प्रदेश में दो अगस्त से स्कूल खुलेंगे। दंतेवाड़ा जिले के भांसी गांव के नक्सलगढ़ मासापारा में 7 साल बाद नए भवन में कक्षाएं लगेंगी। तस्वीर में दिख रहे युवक सरेंडर नक्सली अनिल और शंकर हैं। इन्हें जैसे ही सोमवार से स्कूल खुलने की जानकारी मिली, तो ये मासापारा के बच्चों को स्कूल जाने प्रेरित करने लगे।
गांव के बच्चों को एकत्रित कर उन्हें स्कूल के नए भवन लेकर गए और उन्हें बताया कि अब यहां पढ़ाई करने आना है। कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि मासापारा के नए स्कूल भवन में ही 2 अगस्त से फिर से कक्षाएं लगेंगी। स्कूल को दोबारा शुरू कराने जो भी जरूरतें होंगी उसे भी पूरा किया जाएगा। दंतेवाड़ा जिले में सिर्फ मासापारा ही नहीं बल्कि पोटाली, बुरगुम, नहाड़ी सहित अन्य इलाकों में भी नक्सलियों ने साल 2004 से 2014 के बीच 10 से ज्यादा स्कूल, आश्रम भवनों को ढहाया था। अब उन इलाकों के ग्रामीण भी दोबारा स्कूल-आश्रम मांग रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि अंदरूनी इलाकों में जहां भी स्कूल-आश्रम नक्सलियों ने तोड़े थे उसे भी दोबारा बनाने की पूरी कोशिश होगी। गौरतलब है कि बस्तर संभाग के 70 से ज्यादा स्कूल-आश्रमों को साल 2005 से 2014 के बीच नक्सलियों ने ढहाया था।
…नक्सलियों के दबाव में ढहाया था
सरेंडर नक्सली अनिल और शंकर ने बताया कि नक्सलियों के दबाव में आकर हमने तोड़ा था। लेकिन अब चाहते हैं यहां फिर से शिक्षा का बेहतर माहौल बने। दरअसल, ये वही नक्सली हैं, जिन्होंने 2014 में इसी स्कूल को ढहाया था। इन नक्सलियों ने जुलाई 2020 में सरेंडर किया। फिर इन्होंने ही स्कूल बनाने की मांग की, तो कलेक्टर दीपक सोनी ने तुरंत स्वीकृति दी। इन्हीं नक्सलियों ने दोबारा भवन बनाया।



