रायपुर जिला

पुलिस की चूक से चकमा दे गए IPS जीपी सिंह:सस्पेंडेड ADG इस वक्त कहां है? इस सवाल पर अफसरों की बोलती बंद, पुलिस के पास बिना वारंट के गिरफ्तार करने का है अधिकार

सर… सिटी कोतवाली थाने में ADG जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ है, इस पर क्या अपडेट है? ये सवाल सुनकर एडिशनल एसपी लखन पटले मुस्कुराए और बिना जवाब दिए ही लौट गए। ये वाक्या रायपुर के पुलिस कंट्रोल रूम का है। जब डीडी नगर इलाके में हुई एक लूट की वारदात के बारे में अफसर मीडिया को जानकारी दे रहे थे। जीपी सिंह के मामले में कोई भी अफसर कुछ नहीं कह रहा। गुरुवार की रात सिटी कोतवाली में सरकार के खिलाफ साजिश करने के मामले में जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है। इसके बावजूद पुलिस की एक चूक से जीपी सिंह हाथ से निकल चुके हैं, वो कैसे गायब हो गए, कैसे गिरफ्तारी होगी, क्या नियम है, जानिए पूरा मामला इस रिपोर्ट में…

जीपी सिंह पर सवाल को लेकर अफसर असहज नजर आए।
जीपी सिंह पर सवाल को लेकर अफसर असहज नजर आए।

आंखों के सामने से गायब हुए जीपी
ACB और पुलिस सूत्रों के मुताबिक राजद्रोह का केस दर्ज होने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को जीपी सिंह बिलासपुर गए। यहां अपने कुछ करीबी लोगों से मुलाकात की। पीछे-पीछे रायपुर पुलिस की खुफिया टीम जीपी सिंह पर नजर रखे हुए थी। किसी को शक न हो इसलिए पुलिस की टीम गाड़ियां बदलकर पीछा कर रही थी। जानबूझकर जीपी सिंह की कार से कुछ फासला रखा गया था। जब जीपी सिंह बिलासपुर पहुंचे तो एक अफसर उन पर नजर रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। एक जगह पर बाहर पुलिस की टीम इंतजार कर रही थी। मगर जीपी सिंह वहां से कब निकले किसी को पता नहीं चला। ये बात सामने आई कि जिस टीम पर नजर रखने का जिम्मा था उसकी गाड़ी की चाबी खो गई और इसी चूक का फायदा जीपी सिंह को मिल गया।

शुक्रवार को जब ये कार जीपी सिंह के बंगले के बाहर रुकी और इसमें उन्हीं की कद काठी का सिख युवक उतरा तो बाहर खड़ी पुलिस टीम चौंक गई थी।
शुक्रवार को जब ये कार जीपी सिंह के बंगले के बाहर रुकी और इसमें उन्हीं की कद काठी का सिख युवक उतरा तो बाहर खड़ी पुलिस टीम चौंक गई थी।

छत्तीसगढ़ के बाहर भी नजर रखने की खबर
बुधवार के दिन करीब 5 टीमें जीपी सिंह पर नजर रखे हुए थी, जो हर थोड़ी दूरी पर दूसरी टीम को अपडेट दे रही थी। इस घेराबंदी के बाद भी कभी सुपरकॉप के नाम से मशहूर जीपी सिंह सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए। अब रायपुर के सरकारी बंगले में जीपी सिंह की दो सरकारी गाड़ियां जस की तस खड़ी हैं और बाहर पुलिस का पहरा है। खबर है कि इस केस को लेकर अफसर लगातार बैठकें कर रहे हैं। खबर ये भी है कि प्रदेश में जीपी सिंह के कुछ करीबी कारोबारी और दोस्तों पर भी पुलिस नजर रखे हुए है। एमपी, ओडिशा और पंजाब में भी जीपी से जुड़ी हर अपडेट पर नजर रखी जा रही है।

जीपी सिंह खुद ACB के चीफ रह चुके हैं इसी कार्यकाल के दौरान लोगों को ब्लैकमेल का वसूली के आरोप उन पर लगे हैं।
जीपी सिंह खुद ACB के चीफ रह चुके हैं इसी कार्यकाल के दौरान लोगों को ब्लैकमेल का वसूली के आरोप उन पर लगे हैं।

कैसे हो सकती है गिरफ्तारी

सस्पेंडेड IPS जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज है। ऐसे में पुलिस के पास अपने ही अफसर के खिलाफ एक्शन लेने के कौन से अधिकार हैं ये दैनिक भास्कर के पाठकों के लिए कुछ लॉ एक्सपर्ट ने साझा किया। एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में लॉ के असिस्टेंट प्रोफेसर और राजद्रोह के मामलों पर PHD कर रहे अभिवन शुक्ला ने बताया कि इस केस में पुलिस को गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट की जरूरत नहीं होती है। FIR दर्ज किए जाने के फौरन बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। अगर ये केस किसी IPS या IAS के खिलाफ हो जैसा कि इस मामले में है तो भी पुलिस को कोई विशेष अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती।

जीपी सिंह 1994 बैच के IPS हैं।
जीपी सिंह 1994 बैच के IPS हैं।

क्या जीपी सिंह को मिल जाएगी जमानत?
लॉ के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिनव शुक्ला ने बताया कि सस्पेंडेड ADG को अग्रिम जमानत मिलेगी या नहीं ये कोर्ट पर निर्भर करता है। हालांकि राजद्रोह के प्रकरणों में अग्रिम जमानत मुश्किल कड़ी है। क्योंकि ये एक्ट ही गैर जमानती है। इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल किया हुआ है। इसका मतलब ही है कि इस मामले में किसी भी तरह की सुनवाई वगैरह से पहले नोटिस सरकार के पास भी जाएगा। फिर बात जमानत की आती है, इस मामले में कोर्ट ये देखेगी कि क्या सच में जीपी सिंह के घर या ठिकानों से मिले दस्तावेज राजद्रोह के मामले के स्तर के हैं। यदि नहीं तो कोर्ट उन्हें जमानत दे सकती है। ऐसा कई मामलों में हुआ है।

हर वक्त जीपी सिंह के बंगले के बाहर पहरा होने के बाद भी उन पर सख्ती नहीं की जा सकी।
हर वक्त जीपी सिंह के बंगले के बाहर पहरा होने के बाद भी उन पर सख्ती नहीं की जा सकी।

अब तक क्या कुछ हुआ जीपी सिंह मामले में

  • ACB ने सिंह के पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले पर 1 जुलाई की सुबह 6 बजे छापा मारा था। राजनांदगांव, ओडिशा के 15 अन्य ठिकानों पर भी एक साथ कार्रवाई की गई थी।
  • करीब 68 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली कार्रवाई के दौरान 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति के साथ बंगले के पीछे गटर से कई डॉक्यूमेंट्स मिले थे। इन्हें ही राजद्रोह के लिए साक्ष्य माना गया है।
  • छापे से मिली संपत्ति के आधार पर उनपर ACB ने भ्रष्टाचार के मामले में FIR दर्ज करवाई इसके आधार पर शासन ने 5 जुलाई को उन्हें सस्पेंड किया।
  • 8 जुलाई की रात जीपी सिंह के घर से मिले दस्तवोज के आधार पर उनपर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया।
  • शुक्रवार 9 जुलाई को जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है जिसमें CBI जांच की मांग की गई, सरकार ने इस वजह से कैविएट दायर किया है।

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